सचिवालय का पास 25 हजार रुपए में बिक रहा है। यह खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने सोमवार देर रात विधान भवन के सामने लेन-देन को लेकर झगड़ रहे दो हाई-प्रोफाइल धंधेबाजों को गिरफ्तार किया।
उनके पास से सपा का झंडा, सचिवालय पास, जैमर व हूटर लगी सफारी व स्कॉर्पियो बरामद हुई है। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पास बनवाने में सचिवालय प्रशासन के एक अनुसचिव और समीक्षा अधिकारी समेत कई अन्य कर्मचारी लिप्त हैं। पुलिस का दावा है कि शहर में सचिवालय पास बनाने वाला रैकेट सक्रिय है।
सीओ हजरतगंज दिनेश यादव ने बताया कि सोमवार देर रात विधान भवन के सामने स्कॉर्पियो सवार राम दुलार सिंह यादव एवं सफारी सवार जगदीश उर्फ मुन्नू सिंह चौहान आपस में लड़ रहे थे।
दोनों को पकड़कर कोतवाली लाया गया। लिबर्टी कॉलोनी सर्वोदय नगर के जगदीश ने पुलिस को बताया कि उसने रामदुलार का सचिवालय पास बनवाया था। इसके एवज में उसे 25 हजार रुपये मिलने थे।
सचिवालय के अफसरों के आए नाम
गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने सचिवालय के अफसरों का नाम लिया है। पुलिस के अनुसार जगदीश सिंह चौहान ने पूछताछ में बताया कि इस गोरखधंधे में सचिवालय प्रशासन के एक अनुसचिव और समीक्षा अधिकारी समेत कई अन्य कर्मचारी लिप्त हैं।
उसने बताया कि सचिवालय का पास अनुसचिव नागेंद्र बहादुर सिंह के आदेश पर बना है। पुलिस जांच कर रही है कि अनुसचिव ने जगदीश का पास किस आधार पर बनाया है। जगदीश किस पेशे से जुड़ा हैं।
सचिवालय जाने का मकसद क्या था? जगदीश के सफारी में लगे पास की वैधता समाप्त हो चुकी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ठेकेदार राम दुलार का पास किस अफसर के आदेश पर बना। राम दुलार का पास दिसंबर 2013 तक वैध है।
सफेदपोशों से भी रिश्ते कुबूले पुलिस की मानें तो जगदीश ने सफेदपोशों से भी रिश्ते कबूले हैं। उसने खुद को सत्ताधारी पार्टी के एक नेता का खास बताया। पुलिस नेताओं के संबंधों की भी जांच कर रही है। पुलिस इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि कहीं पास बनवाने के रैकेट में उनका हाथ भी तो नहीं है।