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भूमिहीन किसानों से खरीदा सैकड़ों मीट्रिक टन धान

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अंबेडकरनगर। सरकार किसानों की आय दोगुना करने के प्रयास में जुटी है लेकिन अफसर इन अन्नदाताओं के हिस्से का करोड़ों डकारे जा रहे हैं। ताजा मामला जिले में धान खरीद में बरती गई धांधली का है। यहां दर्जनों ऐसे किसानों के नाम पर धान खरीद दिखा दी गई, जिनके पास कृषि योग्य भूमि ही नहीं है।
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वहीं कई मामलों में किसी किसान के नाम से दिखाई खरीद उसकी कुल उपज से 100 गुना से भी ज्यादा है। पूरे खेल में बिचौलिए, आढ़तिए, राइस मिलर व क्रय केंद्र प्रभारी के साथ विभागीय अधिकारी भी मोटी रकम हजम कर गए हैं।


गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 में धान की खरीद जिले में भी बड़े पैमाने पर हुई थी। जिले को 13 लाख कुंतल धान खरीद का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष 11 लाख 500 कुंतल धान की खरीद हुई। शासन ने इस पर जिला प्रशासन को जांच के निर्देश दिए थे। इसमें कहा गया कि जिन किसान के नाम से 50 मीट्रिक टन से अधिक की खरीद हुई है, उनकी स्थलीय जांच कराई जाए।
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इसी जांच में कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। लेखपालों ने अलग-अलग तहसीलों में संबंधित किसानों व उनकी कृषि योग्य भूमि का सत्यापन करना शुरू किया तो दर्जनों ऐसे किसान मिले जिनके नाम पर कृषि योग्य भूमि ही नहीं है। अहिरौली थाना क्षेत्र अंतर्गत मरथुआ सरैया गांव में 26 किसान ऐसे पाए गए जिनके नाम पर जमीन नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम से धान की बिक्री दिखा दी गई।


उधर जलालपुर टीकमपुर के लेखपाल ने 30 अप्रैल 2018 को भेजी एक रिपोर्ट में कहा है कि क्षेत्र के 8 ग्रामीण ऐसे पाए गए जिनके नाम पर कोई भूमि नहीं है। इनके पति व पिता के नाम भूमि है, हालांकि धान की खरीद संबंधित ग्रामीणों के नाम पर की गई है। अकबरपुर तहसील क्षेत्र के अलावा टांडा, जलालपुर, आलापुर व भीटी तहसीलों से भी जो रिपोर्ट आई है, वह बड़े घोटाले की तरफ इशारा कर रही है।


लेखपालों ने जो रिपोर्ट दी है, उसके अनुसार दर्जनों किसान ऐसे हैं जिनके नाम मामूली भूमि है, लेकिन उस पर होने वाली सामान्य पैदावार की अपेक्षा 100 गुना अधिक तक पैदावार दिखा कर खरीद की गई है। प्रशासन की जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल में आढ़तियों के अलावा कई राइसमिलर, बिचौलिए व क्रय केंद्र प्रभारी भी शामिल हैं।
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