बहराइच/श्रावस्ती। तराई में शुक्रवार दोपहर बाद अचानक मौसम बदल गया। बहराइच के साथ ही श्रावस्ती में धूल भरी आंधी चली।
जंगल और सीमावर्ती इलाकों में बौछारों के साथ हल्के ओले पड़े। गेहूं, अरहर और आम की फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कई स्थानों पर पेड़ गिरे, डालें टूटी।
इससे बिजली व्यवस्था चरमरा गई। शहर के साथ ग्रामीण अंचलों में भी बिजली गुल हो गई। जंगल से सटे गांवों में सात ग्रामीणों के छप्पर व टीनशेड उड़ गए।
तराई में मौसम का मिजाज सुबह से सामान्य था। तेज धूप निकली हुई थी। लोगों को गर्मी का एहसास हो रहा था। लेकिन दोपहर बाद एक बजे के आसपास अचानक आंधी आ गई।
आसमान में बादल छा गए। धूल भरी आंधी का असर पूरे जिले में लगभग आधे घंटे तक रहा। इससे महसी, शिवपुर, खैरीघाट, नानपारा, नवाबगंज, मिहींपुरवा इलाकों में कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां टूटकर गिरीं। पांच स्थानों पर पेड़ भी ढहे।
जबकि जंगल से सटे अमृतपुर पुरैना गांव में सात ग्रामीणों के छप्पर व टीनशेड उड़ गए। दो मकानों की दीवारें भी ढह गईं। अफरा-तफरी की स्थिति मच गई। आंधी थमी तो जंगल व नेपाल सीमा से सटे मिहींपुरवा, नवाबगंज, रुपईडीहा इलाकों में बौछारें पड़ीं।
चने के आकार के ओले भी गिरे। जिससे किसान परेशान हो उठे। आम, गेहूं और दलहनी फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है। आंधी-पानी के बीच जिले में बिजली भी गुल हो गई।
वहीं श्रावस्ती जिले के भिनगा, जमुनहा व सिरसिया क्षेत्र में शुक्रवार शाम को धूल भरी हवा के साथ झमाझम बरसात हुई। इसके साथ ही छोटे आकार के ओले भी गिरे।
अचानक हुई इस बरसात के कारण जिन किसानों द्वारा खेत में लगी मसूर, अलसी व सरसों की फसल को काट कर खलिहान में रखा गया था।
उन फसलों के भीगने के कारण उनमें माहू रोग का खतरा बढ़ गया है। साथ ही इस बरसात से बागों में लगे आम के बौर के झरने से आम की पैदावार में दस से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।