राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) की नियुक्ति की न्यूनतम योग्यता को बीएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक नर्सिंग कर दिया है। अब सीएचओ के पद पर जीएनएम आवेदन नहीं कर पाएंगी। एनएचएम ने 1800 सीएचओ के पद का विज्ञापन हाल ही में जारी किया है। प्रशिक्षित जीएनएम (जनरल नर्सिंग मिडवाइफ) ने इस पर आक्रोश व्यक्त किया है।
प्रदेश में स्वास्थ्य उप केंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में उच्चीकृत करके कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की तैनाती 2019 में शुरू हुई थी। इसके लिए 07 मई 2019 को लगभग 6000 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इनमें से जुलाई 2019 सत्र के लिए 2805 और जनवरी 2020 सत्र के लिए 3195 सीएचओ की भर्ती होनी थी। सीएचओ पद पर आवेदन के लिए उस दौरान जीएनएम और बीएससी नर्सिंग को आवेदन का मौका दिया गया था। नियुक्ति के लिए एक लिखित परीक्षा का आयोजन किया था।इसमें सफल अभ्यर्थियों को इग्नू से पंजीकृत कम्युनिटी हेल्थ की छह माह की एक ट्रेनिंग भी कराई गई थी।
लगभग दो साल बाद एक बार फिर स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर सेवाएं मुहैया कराने के लिए 1800 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की तैनाती होनी है। लेकिन इस बार आवेदन का मौका सिर्फ बीएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक नर्सिंग उत्तीर्ण को ही दिया गया है। इसके चलते हजारों प्रशिक्षित जीएनएम सीएचओ बनने से वंचित रह जाएंगे। राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले वह निदेशक एनएचएम से मुलाकात करके न्यूनतम शैक्षिक योग्यता में बदलाव की मांग करेंगे।
आयुष डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने चयन के लिए गए थे हाईकोर्ट
प्रदेश के आयुष डॉक्टर भी सीएचओ के रूप में स्वास्थ्य उपकेद्रों पर तैनाती की मांग कर चुके हैं। इसके लिए आयुष डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में वर्ष 2019 में एक याचिका भी दाखिल की थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने सीएचओ ब्रिज कोर्स का परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी। एसोसिएशन का दावा था कि भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार बीएएमएस या बीयूएमएस चिकित्सक भी सीएचओ पद के लायक हैं।
जब आयुष डॉक्टर न मिलें तब नर्सिंग संवर्ग का चयन किया जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में आयुष डॉक्टर्स के पक्ष में एनएचएम के सकारात्मक रुख को देखते हुए याचिका का निस्तारण किया था। एसोसिएशन का कहना है कि एनएचएम ने भविष्य में होने वाली सीएचओ की भतियों में आयुष डॉक्टरों को भी मौका देने की बात कही थी।