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UP: हमारे आसपास मंडरा रहीं 18 तरह की तितलियां, विद्यार्थियों ने खोजीं मकड़ी...मेंढक और पतंगों की भी प्रजातियां

Thu, 22 May 2025 02:03 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

52 तरह की मकड़ियां और 18 प्रकार की तितलियां। इतना ही नहीं 24 तरह के मेंढक और 58 प्रकार के पतंगे... जीवों की ये प्रजातियां काल्पनिक नहीं हैं। गौर से देखने पर आसपास विशेष रूप से तराई क्षेत्रों में ये प्रजातियां आपको नजर आएंगी। 
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चिड़ियाघर में तितली (सांकेतिक) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने मकड़ी, मेंढक और पतंगों की कई प्रजातियों की खोज की है। 22 मई को जैव-विविधता दिवस को देखते हुए इन सभी के चित्रों को पोस्टर के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका अनावरण कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय करेंगे।

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लविवि के इंस्टीट्यूट ऑफ वाइल्ड लाइफ सांइसेज की निदेशक प्रो. अमिता कनौजिया ने बताया कि प्राणि विज्ञान विभाग के चार शोधार्थियों ने तराई अंचल में जैव-विविधता पर काम करते हुए कई प्रजातियां खोजी हैं। 

कृतिका राव ने तराई में मकड़ियों की 52 प्रजातियां तलाशी हैं। छात्रा ज्योति ने 18 तरह की तितलियां और उनकी पांच इल्लियां खोजने में सफलता पाई है। इसी तरह प्रशांत त्रिपाठी ने 24 तरह के मेंढक और छात्र शिवांशु राठौर ने पतंगों की 58 प्रजातियां चिह्नित की हैं।

रंग ला रही है कोशिश

प्रो. अमिता ने बताया कि जीव-जंतुओं की ये प्रजातियां हमारे लिए सकारात्मक पहलू है। इतनी ज्यादा संख्या में मिलीं ये प्रजातियां बताती हैं कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे काम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

...इसलिए जरूरी है जैव-विविधता

प्रो. अमिता ने बताया कि प्रकृति का निर्माण बेहद संतुलित तरीके से हुआ है। कोई न कोई जीव किसी न किसी पर आधारित और आश्रित है। मेंढक, तितली, मकड़ी और पतंगे ही नहीं, इस तरह के लाखों जीव पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  • मेंढक: मेंढक उभयचर होते हैं, जो जल और स्थल दोनों में जीवन जीते हैं। ये कीड़ों, कीटों को खाकर उनकी आबादी नियंत्रित रखते हैं। साथ ही जल प्रदूषण कम करने में भी सहायक होते हैं।
  • तितलियां: तितलियां परागकण की प्रक्रिया से बीजों व पौधों के विकास का कार्य करती हैं।
  • मकड़ी: मकड़ी कीट-पतंगों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित रखती हैं। 
  • पतंगे: पतंगे जैव-विविधता को कायम रखने में सहायक होते हैं। मकड़ी, मेंढक और अन्य जंतुओं के आहार का काम करते हैं।

 

दुनिया में 1.2 करोड़ तरह के जीव-जंतु

प्राणि विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. सेराजुद्दीन ने बताया कि दुनियाभर में 1.2 करोड़ प्रकार के जीव-जंतु हैं। ये सभी हमारे पर्यावरण में संतुलन बनाने के लिए जरूरी हैं। सभी का संरक्षण होना चाहिए।

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