लखनऊ। साइंस सिटेशन इंडेक्स (एससीआई) ग्लोबल रैंकिंग में विश्व के श्रेष्ठ पांच फीसदी वैज्ञानिकों में लखनऊ के कई शिक्षकों को स्थान मिला है। सबसे ज्यादा लखनऊ विश्वविद्यालय के 18 शिक्षकों को इस सूची में स्थान मिला है। इसके अलावा शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि और बीबीएयू के शिक्षकों भी स्थान मिला है। एससीआई एक प्रतिष्ठित डाटा बेस है जिसमें दुनियाभर के सबसे उच्च गुणवत्ता वाले विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान पत्रिकाओं को सूचीबद्ध किया जाता है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के जिन 18 शिक्षकों को इस वैश्विक रैंकिंग में स्थान मिला है, उनमें भौतिकी विभाग से प्रो. पूनम टंडन, प्रो. राजीव मनोहर, प्रो. एके सिंह, प्रो. चंद्रकिरण गौतम, प्रो. अमृतांशु शुक्ला, प्रो. विवेक कुमार सिंह और प्रो. सतेंद्र पाल सिंह शामिल हैं। इसके अलावा रसायन विज्ञान के प्रो. नरेंद्र कुमार सिंह व डॉ. शशि बाला, जंतु विज्ञान की प्रो. मोनिशा बनर्जी, जैव रसायन के प्रो. सिद्धार्थ कुमार मिश्रा व डॉ. आशुतोष सिंह, सांख्यिकी के प्रो. शशि भूषण, गणित एवं खगोल विज्ञान के प्रो. राजेंद्र प्रसाद , वनस्पति विज्ञान के प्रो. राजेश कुमार तिवारी, प्रो. शालिनी श्रीवास्तव व डॉ. अजेय सिंह और बायोकेमिस्ट्री से डॉ. मधु कामले का नाम शामिल है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
लविवि से प्रो. राजेंद्र प्रसाद को मिली सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग
फोटो- तीनों की
वैश्विक रैंकिंग में प्रो. राजेंद्र प्रसाद लविवि से सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक रहे। उन्हें विश्व में 204,937वां स्थान प्राप्त हुआ। वहीं डॉ. शशि बाला को 225,679वां और प्रो. पूनम टंडन को 345,543वां स्थान प्राप्त हुआ है।
पुनर्वास विवि के कुलपति का भी नाम
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विश्व के टॉप पांच फीसदी वैज्ञानिकों की सूची में शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि के कुलपति प्रो. संजय सिंह और यहां के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक चंद्र कुमार दीक्षित का भी नाम शामिल है। प्रो. संजय सिंह के 199 शोध प्रकाशित हो चुके हैं। वहीं प्रो. दीक्षित के नाम 38 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट दर्ज हैं।
भाषा विवि के कुलपति को भी मिला स्थान
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि के कुलपति प्रो. अजय तनेजा को भी इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है।यह सम्मान उनके दीर्घकालिक शोध कार्योंं, अकादमिक योगदान, वैज्ञानिक प्रकाशनों व वैश्विक शोध प्रभाव के लिए दिया गया है।