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बैराज पुल से आइए, 18 सेमी. के गड्ढे में हिचकोले खाते जाइए

Mon, 08 Jan 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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उमर उजाला ने नापा स्केल से गड्ढा। - फोटो : अमर उजाला
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राजधानी में गोमती के दोनों ओर बसी आबादी को बीते 30 साल से जोड़े रहे बैराज पुल को इतिहास में पहली बार वन-वे तो कर दिया गया, लेकिन इसकी टूटी सड़क नहीं बनाई गई।
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पुल के शुरू ओर खत्म होने पर कई मीटर तक क्षतिग्रस्त सड़क में 18 से 20 सेंटीमीटर गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जो यहां से गुजरने वाले दो पहिया हो या चार पहिया, सभी वाहनों में सवार लोगों के लिए आफत बने चुके हैं।

वन-वे करने के पीछे कारण हजारों वाहन स्वामियों को राहत देना है, लेकिन जो सड़क सबसे ज्यादा जरूरी है, उसे ही नहीं सुधारा गया है। इस सड़क की मरम्मत उसी ठेकेदार से करवाई जानी है, जिसने रिवर फ्रंट डवलपमेंट के दौरान बैराज पुल को नुकसान पहुंचाया था।
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ठेकेदार ने अपनी मर्जी से एक साल तक इस बैराज पुल को ठीक नहीं किया। सुरक्षा की वजह से इसे बंद रखना पड़ा। अब इसे आंशिक रूप से छोटे वाहनों के लिए खोला गया है, लेकिन सड़क नहीं बनवाई जा रही है, जिससे हर रोज हजारों वाहन चालक गड्ढों और झटकों भरा सफर सह रहे हैं।

लापरवाही : ठेकेदार की मनमानी, फिर भी उस पर कार्रवाई नहीं

गोमती रिवर फ्रंट डवलपमेंट कार्यों की न्यायिक और सीबीआई जांच के चलते कोई अधिकारी इस विषय पर जवाब देने से कतरा रहा है। एक्सईएन स्तर के सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण जिस ठेकेदार फर्म चोपड़ा कंस्ट्रक्शन्स को करवाना है। फर्म को सिंचाई विभाग से चार करोड़ रुपये चाहिए और रकम न मिलने के कारण ठेकेदार काम नहीं करवा रहा है।

खास बात है कि यह पुल भी इसी ठेकेदार द्वारा रिवर फ्रंट डवलपमेंट कार्यों में लापरवाही बरतते हुए तोड़ा गया था। इसके बावजूद न कोई कार्रवाई उस पर हुई न पुल सुधारने का खर्च वसूला गया। हालांकि सिंचाई विभाग ने प्रदेश सरकार से ही इसे सुधारने के लिए चार करोड़ और मांग लिए।
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दो हफ्ते में ठीक होनी थी, दो महीने हो चुके

स्केल से नाप कर देखा गया तो बैराज के गड्ढे 18 से 20 सेमी. गहरे हैं। ऐसी सड़क पर झटके खाकर कार के पहियों के अलाइनमेंट तक बिगड़ जा रहे। आदमी की कमर की हालत भी खस्ता हो जा रही है। ठेकेदार ने इसे दो हफ्ते में पूरा करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो महीने बाद भी काम नहीं शुरू हुआ। 
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