रायबरेली। जिले में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खोले गए चार राजकीय हाईस्कूलों को अपना भवन अब तक नहीं मिल सका है। करीब तीन साल से अपने भवन की उम्मीद लगाए चारों स्कूल नजदीकी जूनियर हाईस्कूल के कमरों में संचालित हो रहे हैं, जिससे पठन-पाठन में बाधा आ रही है। ये चारों विद्यालय सत्र 2015-16 में स्वीकृत हुए थे, जिनका निर्माण कार्य दिसंबर 2016 में शुरू हुआ था। काम पूरा करने का लक्ष्य सितंबर 2017 निर्धारित था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। अभी तक बजट की कमी बताई जा रही थी, लेकिन अब तो बजट मिल गया है, फिर भी काम में तेजी नहीं दिख रही है।
जिले में 18 राजकीय हाईस्कूल संचालित हैं, जिनमें चार राजकीय हाईस्कूलों का अपना भवन नहीं मिल सका है। इनमें राजकीय हाईस्कूल बेलाभेला (राही), चांदा टीकर (लालगंज), सनही (राही) और रोझइया भीखमशाह (जगतपुर) शामिल हैं। इन हाईस्कूलों के भवनों का निर्माण कार्य दिसंबर 2016 में शुरू हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण काम अब तक पूरा नहीं हो पाया। भवन के अभाव में इन चारों स्कूलों का संचालन पड़ोस के जूनियर हाईस्कूलों में किया जा रहा है। कक्षाएं वहीं संचालित होने से जूनियर हाईस्कूल के बच्चों की भी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रत्येक विद्यालय के भवन निर्माण की लागत 69.51 लाख रुपये निर्धारित है। इनमें चारों स्कूलों को पहले 20-20 लाख रुपये अवमुक्त किए गए थे, जिससे करीब एक तिहाई काम पूरा कराया जा सका था। करीब तीन महीने पहले हुई समीक्षा के दौरान जब काम रुका होने और बजट की कमी की बात सामने आई तो लिखापढ़ी की गई। बजट की डिमांड की गई तो फिर 20-20 लाख रुपये प्रदान किए गए। बेलाभेला में यूकेलिप्टस के पेड़ नहीं कटने से भी काम में बाधा आ रही थी। बजट की दूसरी किश्त भी मिल चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य में तेजी नहीं दिख रही है, जिससे स्कूलों को अपना भवन मिलना मुश्किल है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक जीएस मिश्र का कहना है कि, बजट की कमी के चलते निर्माण कार्य लटका था। दूसरी किश्त मिल गई है, जिससे काम में तेजी लाने के निर्देश निर्माण एजेंसियों को दिए गए हैं। बाकी बजट भी दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जब तक विद्यालयों को अपना भवन नहीं मिल जाता है, तब तक कक्षाएं जूनियर हाईस्कूल में ही संचालित होंगी।