कमलापुर (सीतापुर)। मुख्यमंत्री जी, अपने अफसरों की कारगुजारी तो देखिए। कसमंडा ब्लॉक के मोहत्तेपुर गांव को ओडीएफ बताकर वहां के प्रधान को सम्मान भी दिला दिया। जबकि हकीकत इसके उलट है। यहां के ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। इसकी तस्दीक यह तस्वीरें कर रही हैं। गांव की पगडंडियों पर लोटा लेकर खेतों की ओर जा रहे पुरुष व महिलाएं दरअसल खुले में शौचमुक्त के तमगे को सच का आइना दिखा रहे हैं।
ब्लॉक कसमंडा के मोहत्तेपुर गांव में इस तरह का नजारा दिखाई देना इसलिए हैरान करता है, क्योंकि दो दिन पहले ही विद्या ज्ञान स्कूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मोहत्तेपुर के प्रधान राहुल सिंह को गांव खुले में शौचमुक्त होने के लिए सम्मानित किया गया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है, कि जब मोहत्तेपुर के ग्रामीण खुले में शौच जा रहे हैं तो गांव ओडीएफ कैसे कर दिया गया। सवाल सिर्फ गांव को ओडीएफ घोषित करने का नहीं है। मसला यह कि मुख्यमंत्री तक को अंधेरे में रखा गया। कागजों पर ओडीएफ गांव बताकर अफसरों ने न सिर्फ अपनी पीठ थपथपा ली बल्कि मुख्यमंत्री से प्रधान को सम्मान दिलवा दिया। सीएम से सम्मान पाने वाले प्रधान राहुल सिंह के ओडीएफ गांव की हकीकत जानने हम रविवार की सुबह मोहत्तेपुर पहुंचे तो वहां का नजारा देख दंग रह गए। तमाम ग्रामीण लोटा लेकर बाहर शौच करने जा रहे थे। एक ग्रामीण से पूछा कि अब तो गांव ओडीएफ हो गया है फिर यह लोग बाहर शौच क्यों जा रहे हैं। इस पर वह बोला कि घर में शौचालय नहीं तो बाहर जाना मजबूरी है।
ग्रामीण बोले, मजबूरी में जाते बाहर
मोहत्तेपुर के नौमीलाल, गुड्डू और मनमोहन का कहना है कि उनके भाई को शौचालय मिला है। लेकिन वह अपना शौचालय प्रयोग नहीं करने देते हैं। इसलिए बाहर जाना मजबूरी है। ग्रामीणों का तर्क है कि अफसरों ने यह नहीं देखा, जिनके परिवार में बंटवारा हो चुका है, उन्हें अलग-अलग शौचालय दें। बंटवारे वाले कई परिवारों को एक मानकर एक ही शौचालय दिया गया है। जिसके नाम मिला, वह दूसरे के परिवार को शौचालय का प्रयोग नहीं करने देता है। वहीं, मिश्रीलाल ने बताया कि बाहर शौच जाना बुरा लगता है। कई ग्रामीणों को शौचालय का लाभ मिला। कुछ को नहीं मिला है।
गांव में 303 घर, शत-प्रतिशत बने शौचालय
गांव में 303 घर हैं। इनमें से 118 लोगों को हाल में ही शौचालय का लाभ दिया गया हैं। सात लोगों ने निजी शौचालय बनवा रखे हैं। इससे पहले लोहिया ग्राम में चयनित होने पर भी शौचालय बनवाए गए थे। अब यहां सभी घरों में शौचालय हैं।
- राहुल सिंह, प्रधान मोहत्तेपुर
मानक पूरे होने पर घोषित किया गया ओडीएफ
स्वच्छता के मानकों को पूरा करने पर मोहत्तेपुर ओडीएफ किया गया है। सभी परिवारों के पास शौचालय है। हमारी टीमों ने कई दिनों तक गांव पहुंचकर खुले में शौच करने के नुकसान बताए। बाहर शौच नहीं करने को प्रेरित किया। इसके बाद भी ग्रामीणों की आदत नहीं बदल रही तो क्या कर सकते हैं।
- तुलसीराम, डीपीआरओ