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भारत में संविधान भी है और संविधान वाद भी : संजय शुक्ला

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गोंडा। अधिवक्ता परिषद की जिला इकाई की ओर से संविधान दिवस पर रविवार को जिला बार एसोसिएशन सभागार में समारोह एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जनपद न्यायाधीश संजय कुमार शुक्ला ने की। मुख्य वक्ता परिषद के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री अश्वनी त्रिपाठी रहे।
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समारोह को संबोधित करते हुए अपर जनपद न्यायाधीश संजय कुमार शुक्ला ने कहा कि संविधान एक सजीव दस्तावेज है और भारत के अंदर संविधान भी है और संविधान वाद भी। कार्यपालिका की शक्ति नागरिकों के अधिकारों के सुरक्षा का दायित्व सिर्फ न्यायपालिका के पास है। सही तो यह है कि न न्यायपालिका सर्वोच्च है, न विधायिका और न ही कार्यपालिका सर्वोच्च है। भारत में केवल संविधान सर्वोच्च है। मुख्य वक्ता अश्वनी त्रिपाठी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका की शक्तियों के अलग से कोई स्वतंत्र एवं स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। कार्यों का बेहतर संतुलन संविधान की ओर से स्थापित किया गया है। सत्ता के तीनों अंग का परम दायित्व है कि समाज के प्रत्येक अंतिम स्तर के व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना एवं न्याय प्रदान कराना। कार्यक्रम को संरक्षक श्रीमान सिंह, जिलाध्यक्ष घनश्याम पांडेय, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केके मिश्र, केके श्रीवास्तव, राजाबाबू गुप्ता, केके द्विवेदी, उदयभानु मिश्रा, गोकरननाथ पांडेय, सुरेश त्रिपाठी, इन्द्रजीत सिंह व दिव्यानी श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। संचालन अधिवक्ता परिषद के जिला महामंत्री अरविंद सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश मिश्र ने किया। जिला अध्यक्ष ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में ओम प्रकाश शुक्ला, उमेश ओझा, धनलाल तिवारी, पवन शुक्ला, तेज प्रताप सिंह, चंद्र शेखर सिंह समेत काफी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
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