लखनऊ। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय की 40वीं कार्यपरिषद की बैठक में 17 शिक्षकों के चयन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नीति भी स्वीकृत की गई।
कुलपति प्रो. अजय तनेजा की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में विवि के शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। शिक्षकों का चयन स्ववित्तपोषित योजना के तहत संविदा के आधार पर हुआ है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में सैयद असगर हुसैन रिजवी, सतेंद्र शुक्ला, पीयूष पाल, वीरेंद्र कुमार और उन्नीकृष्णन का चयन हुआ। कॉमर्स विभाग में अनुभव तिवारी, पूजा शुक्ला, मृदुला सोनी और उमाकांत को मंजूरी मिली। व्यवसाय प्रशासन विभाग में हिनादी अकबर, रवि कुमार, युसरा अहमद, सुषमा, सौरभ सोनकर और शांतनु कुमार श्रीवास्तव का चयन किया गया। सिविल इंजीनियरिंग विभाग में श्रेया जादौन और आयुष कुमार के चयन को स्वीकृति मिली। कुलपति अजय तनेजा ने कहा कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
तकनीकी नवाचार और डिजिटल दक्षता बढ़ेगी
कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय की प्रस्तावित कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति पर चर्चा की। उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह नीति तैयार की गई है। यह नीति शिक्षण, शोध, परीक्षा और प्रशासनिक कार्यों में एआई के नैतिक और प्रभावी उपयोग पर केंद्रित है। परिषद का मानना है कि यह नीति तकनीकी नवाचार और डिजिटल दक्षता बढ़ाएगी। प्रभारी कुलसचिव विकास ने बताया कि इन निर्णयों से विश्वविद्यालय की प्रगति को गति मिलेगी।