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Lucknow News: म्यूल खातों में मंगवाए ठगी के 16.22 लाख रुपये, तीन गिरफ्तार

Tue, 04 Aug 2026 02:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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लखनऊ। म्यूल खातों में ठगी के 16.22 लाख रुपये मंगाकर विदेश में बैठे सरगना तक पहुंचाने वाले गिरोह के तीन आरोपियों को विकासनगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी घरवालों और परिचितों के नाम पर म्यूल खाते खुलवाते थे। इन खातों में ठगी की रकम आने के बाद डेबिट कार्ड के जरिये रुपये निकालते थे। इसके बाद अपना कमीशन काटकर रकम सरगना तक पहुंचाई जाती थी।
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थानाध्यक्ष आलोक सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकासनगर निवासी सैफ, रेहान खान और जानकीपुरम निवासी नीरज शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, आठ बैंक पासबुक, दो डेबिट कार्ड और 15 हजार रुपये बरामद किए हैं।
पूछताछ में सैफ ने बताया कि उसने अपने घरवालों के नाम पर कई म्यूल खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों में साइबर ठगी के 16.22 लाख रुपये आए थे। नीरज शर्मा ने डेबिट कार्ड के जरिये रकम निकाली। इसमें से अपना, सैफ और रेहान का कमीशन काटने के बाद बाकी रकम विदेश में बैठे गिरोह के सरगना को भेजी गई। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड लक्ष्य यादव है और उसके साथ हिमांशु यादव और आदर्श ठाकुर भी शामिल हैं।
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आरोपियों के खिलाफ 13 राज्यों में 20 मामले दर्ज
पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर आरोपियों का रिकॉर्ड खंगाला। इसमें तीनों के खिलाफ 13 राज्यों में 20 साइबर ठगी की शिकायतें मिली हैं। तमिलनाडु में चार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा में दो-दो शिकायतें हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, ओडिशा, पंजाब और मध्य प्रदेश में एक-एक शिकायत दर्ज है।
मास्टरमाइंड की तलाश
थानाध्यक्ष ने बताया कि भागे चल रहे मास्टरमाइंड व उसके दो साथियों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम हवाला के जरिये तो नहीं भेजी गई। आरोपियों के घरवालों के अन्य बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
ये होते हैं म्यूल खाते
म्यूल खातों का इस्तेमाल साइबर जालसाज ठगी की रकम मंगाने के लिए करते हैं। इसके लिए जालसाज लोगों को ठगी की रकम में कमीशन या कुछ रुपयों का लालच देकर उनके दस्तावेज लेकर बैंक में खाता खुलवाते हैं। इसके बाद वे लोगों से डेबिट कार्ड, पासबुक और अन्य बैंकिंग विवरण ले लेते हैं। इससे ठगों की पहचान छिपी रहती है। इस कारण पुलिस को इन तक पहुंचने में कभी-कभी काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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