सीवर में मजदूरों को उतारा तो इंजीनियरों पर मुकदमा
मशीन से सफाई का है आदेश, लापरवाही से मौतों पर शासन सख्त
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। रोक के आदेश के बाद भी सफाई केलिए सीवर में मजदूरों को उतारे जाने को शासन ने गंभीरता से लिया है। अब ऐसे मामलों में इंजीनियरों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही मुख्य अभियंता की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसको लेकर शासन आदेश जारी करने जा रहा है।
सीवर लाइन की सफाई के दौरान हादसों का देखते हुए बीते साल ही सरकार मैनहोल में मजदूरों को उतारने पर रोक लगा चुकी है। उसको लेकर आदेश भी जारी कर हो चुका है। आदेश में साफ किया जा चुका है कि सीवर लाइन की सफाई का काम मशीनों से ही कराया जाएगा।
आदेश के बावजूद अधिकारी वे ठेकेदार सीवर सफाई के लिए मजदूरों को उतारते हैं। शनिवार को भी दो मजदूरों की जहरीली गैस में दम घुटने से मौत हो गई। जिसमें अधिशासी अभियंता खालिद अहमद, सहायक अभियंता अविनाश सिंह और अवर अभियंता मनीष वर्मा को निलम्बित किया गया है मगर अभी ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर होना बाकी है। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल वाजपेयी ने कहा कि आगे से मुख्य अभियंता को भी जिम्मेदार बनाया जाएगा। उनके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। हादसा होने पर दोषी इंजीनियरों को निलम्बित ही नहीं किया जाएगा उन पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उसको लेकर एक-दो दिन में विस्तृत आदेश जारी हो जाएगा।
बिना आदेश काम करा रहा था ठेकेदार
जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल वाजपेयी का कहना है कि काम कराने के लिए इंजीनियर बांड बनाते हैं जिसमें ठेकेदार को काम की जिम्मेदारी दी जाती है मगर अयोध्या रोड पर बांड ही नहीं जारी किया गया था। यह बड़ी गड़बड़ी है। काम के समय इंजीनियर को मौजूद रहना चाहिए था। जांच का आदेश दे दिया है, रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी। ठेकेदार पर भी केस दर्ज होगा।