विभीषणों को बाहर का रास्ता दिखाने का संकेत दे गईं प्रियंका
रायबरेली। अपने ही गढ़ में कांग्रेस की जमीन खिसक रही है। लोकसभा चुनाव में रायबरेली संसदीय सीट पर जीत का अंतर कम हो गया तो अमेठी में राहुल गांधी चुनाव हार गये।
समीक्षा बैठक में भाग लेने आईं राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा गांधी ने इसे गंभीरता से लिया और खुले मंच से अपने इरादे भी जाहिर कर दिए कि अब अरसे से पार्टी में पल रहे विभीषणों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
जिस तरह उन्होंने तल्ख जुबानी की, उससे जाहिर है कि आने वाले समय में संगठन में बड़े बदलाव तय हैं। पार्टी अब फोटो खिंचाने वालों को नहीं काम करने वालों को तरजीह देगी। यही संकेत देकर प्रियंका अपनी मां सोनिया गांधी के साथ गुरुवार को दिल्ली चली गईं।
इतिहास गवाह है कि गांधी परिवार के इर्द-गिर्द ही रायबरेली की सियासत हमेशा घूमी है। फिरोज गांधी ने यहां से जीत का जो सिलसिला शुरू किया, उसी रथ पर सवार होकर कांग्रेस यहां आगे बढ़ती रही।
वर्ष 2004 से सांसद सोनिया गांधी लगातार यहां से सांसद चुनी जा रही हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सोनिया ने पांचवीं बार यहां से चुनाव जीतकर इतिहास भी रचा, लेकिन लोकसभा का यह चुनाव पिछले चुनावों की अपेक्षा अलग था।
सोनिया चुनाव जरूर जीतीं, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम हो गया। इसके बाद से गांधी परिवार इसको लेकर चिंतन और मंथन करने में जुट गया है कि आखिर यह सब कैसे हो गया। किस स्तर पर ढिलाई हुई।
वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने किस स्तर पर लापरवाही बरती। यह सब तब हुआ, जब सोनिया ने सरेनी में जनसभा की तो प्रियंका ने हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर इस बार सोनिया पांचवीं बार और पांच लाख पार के नारे को सार्थक करने का प्रयास किया।
इसके बावजूद परिणाम संतोषजनक नहीं रहे। इसी सिलसिले में बुधवार को प्रियंका वाड्रा ने भुएमऊ गेस्ट हाउस में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 40 जिलों के हारे प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों के साथ ही रायबरेली संगठन के पदाधिकारियों के बीच हार की समीक्षा की।
उन्होंने माना कि इस बार जनता ने सोनिया को चुनाव जिताया। नेताओं और संगठन ने मन से काम नहीं किया। उनका इशारा साफ था कि संगठन में ऐसे कुछ विभीषण हैं, जो खाते तो कांग्रेस की हैं लेकिन बजाते दूसरे दलों की।
अब समय आ गया है कि इन विभीषणों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। अंदरखाने की मानें तो जल्द ही संगठन में बदलाव का दौर शुरू होगा। लोकसभा चुनाव में मां सोनिया गांधी की जीत का अंतर कम होने से प्रियंका इस कदर खफा हैं कि बुधवार और गुरुवार को उन्होंने संगठन के लोगों को नजरअंदाज किया।
उन्होंने किसी से बात तक नहीं की। बस उन्होंने भुएमऊ में बनाए गये मंच से कुछ शब्द बोलकर अपने इरादे जाहिर कर दिए और बातों-बातों में ही सब कुछ कह दिया।
अंदरखाने की मानें तो प्रियंका के खफा होने से संगठन के पदाधिकारी भी सहमे नजर आए। उन्हें इस बात का मलाल है कि चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया गया।
भुएमऊ गेस्ट हाऊस में समाजसेवी एवं वरिष्ठ कांग्रेसी जगदीश शुक्ल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल प्रियंका वाड्रा से मिला। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी में बदलाव व विस्तार पर चर्चा की।
उन्होंने सुझाव दिया कि कमेटी में पुराने कांग्रेस परिवार के लोगों को रखकर कमेटी का विस्तार किया जाए, जिसमें मुख्य रूप से पूर्व विधायक, पूर्व एमएलसी, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष, पूर्व ब्लॉक प्रमुख व कद्दावर नेता रहे हों, उन परिवारों की नई पीढ़ियों को शामिल किया जाए।
साथ ही सुझाव दिया कि 2022 के विस चुनाव में किसी पार्टी से गठबंधन न किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में संतोष सिंह, हाजी उस्मान, मुन्ना घोसी, शैलेंद्र तिवारी मौजूद रहे।