गृहकर का ऑनलाइन नामांतरण एक अप्रैल से शुरू होना था। इसके लिए प्रमुख सचिव नगर विकास ने मार्च में आदेश जारी किया था, लेकिन अब तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। एनआईसी अभी तक नामांतरण का सॉफ्टवेयर ही नहीं बना पाया है। उसने नगर निगम से अभी एक सप्ताह का और समय मांगा है। ऐसे में गृहकर नामांतरण का काम अभी ऑफलाइन ही चल रहा है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने मार्च में आदेश किया था कि 31 मार्च के बाद मैनुअल गृहकर नामांतरण नहीं किया जाएगा। एक अप्रैल से ऑनलाइन काम होगा। तब से दो माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी अब तक गृहकर दाताओं को घर बैठे नामांतरण कराने की सुविधा नहीं मिल पाई है।
अभी सिर्फ नगर निगम के अंदर ही ऑनलाइन सिस्टम इंफ्रानेट के माध्यम से चलाया जा रहा है, जिसमें अधिकारी ही उसको देख पाते हैं। लेकिन कोई गृहकर दाता उसके जरिये आवेदन नहीं कर पाता है।
सिक्योरिटी जांच पुख्ता करने में लग रहा समय
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि एनआईसी सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है। सॉफ्टवेयर काफी बड़ा है। सिक्योरिटी की जांच कई स्तर पर हो रही है। इस कारण एनआईसी को सॉफ्टवेयर बनाने में समय लग रहा है।
सोमवार को फिर बात की गई तो एनआईसी ने एक सप्ताह का समय और मांगा है। प्रदेश में अभी कहीं पर भी ऑनलाइन गृहकर नामांतरण नहीं शुरू हो पाया है। लखनऊ नगर निगम का जो सॉफ्टवेयर बन रहा है उसी के आधार पर अन्य नगर निगम का भी बनेगा।
सुविधा शुरू होने से यह होगा फायदा
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि ऑनलाइन सिस्टम शुरू होने के बाद कोई भी भवन स्वामी बिना नगर निगम आए कहीं से भी गृहकर नामांतरण के लिए आवदेन कर सकेगा। उसके बाद उसी के जरिये वह अपना नामांतरण प्रमाणपत्र भी पा सकेगा।
इससे आवेदक को नगर निगम के कार्यालय तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कर्मचारी नामांतरण की फाइलों को अटका नहीं पाएंगे। अभी कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि नामांतरण में के लिए दौड़ाया जा रहा है, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में कोई भी अधिकारी यह देख सकेगा कि फाइल किस स्तर पर है। इससे उसकी जवाबदेही तय हो जाएगी।
एक सप्ताह का समय और लगेगा
गृहकर नामांतरण काफी महत्वपूर्ण कार्य है। इस कारण हर स्तर पर उसकी जांच जरूरी है, ताकि कहीं कोई चूक न रह जाए। एनआईसी अधिकृत सरकारी संस्था है, उसी से सॉफ्टवेयर बनवाया जा रहा है। लगातार काम चल रहा है। अब एक सप्ताह का और समय एनआईसी ने मांगा है।
- अशोक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी