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Lucknow News: पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में 130 विद्यार्थियों को दिए जाएंगे 156 पदक

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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
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लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह इस बार केवल उपाधियां बांटने का अवसर नहीं, बल्कि हौसले, प्रतिभा और समावेशी शिक्षा की मिसाल बनने जा रहा है। 31 जुलाई को आयोजित होने वाले समारोह में 130 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 156 पदकों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 45 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 22 स्वर्ण पदक शामिल हैं। समारोह में कुल 1,919 विद्यार्थियों को उपाधियां भी प्रदान की जाएंगी, जिनमें 17 शोध उपाधियां हैं।
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विश्वविद्यालय के प्रवक्ता यशवंत वीरोदय ने बताया कि यह पदक विजेताओं की अंतिम सूची है। कुल 156 पदकों में 77 छात्राओं को 91 और 53 छात्रों को 65 पदक मिलेंगे। इनमें 57 विद्यार्थियों को स्वर्ण, 36 को रजत और 37 को कांस्य पदक प्रदान किए जाएंगे। उपाधि प्राप्त करने वालों में 955 छात्राएं और 964 छात्र शामिल हैं।

कोट

27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने कुल 45 पदक हासिल किए हैं। इनमें 13 दिव्यांग छात्राएं और 14 दिव्यांग छात्र शामिल हैं, जिन्होंने 22 स्वर्ण पदक जीते हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्शाता है कि अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी सीमा को स्वीकार नहीं करती। - आचार्य संजय सिंह, कुलपति, पुनर्वास विवि
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मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाने का सपना होगा साकार

विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री के हाथों पदक मिलने की सूचना पाकर बड़ी खुशी हुई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री जी से मिल पाऊंगी। इस उपलब्धि के पीछे मेरे माता-पिता और गुरुजनों का सहयोग है। मुझे एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक मिला है। - श्रद्धा सिंह पटेल, बीटेक (ईसीई)

मुख्यमंत्री पदक के लिए चयनित

मानसी सिंह (बीटेक सीएसई) – मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक
साक्षी मिश्रा (बीटेक सीएसई) – रजत पदक

श्रद्धा सिंह पटेल (बीटेक ईसीई) – कांस्य पदक

दिव्यांग श्रेणी

इरशाद आलम (बीएड स्पेशल एजुकेशन) – स्वर्ण पदक प्रनाम्या मिश्रा (बीएड स्पेशल एजुकेशन) – स्वर्ण पदक

अंकिता राजभर (बीएड स्पेशल एजुकेशन) – स्वर्ण पदक
कुलाध्यक्ष पदक के लिए चयनित

आकाश पटेल (परास्नातक) – स्वर्ण

आयुषी विश्वकर्मा (एमएससी सांख्यिकी) – रजत

अनामिका (एमए हिंदी) – कांस्य
दिव्यांग श्रेणी

पूजा सागर (एमए हिंदी) – स्वर्ण सेजल पांडेय (एमएड स्पेशल एजुकेशन) – स्वर्ण

राना प्रताप (एमए हिंदी) – स्वर्ण

विषयवार कुलपति पदक के लिए भी मेधावियों का चयन

दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुलपति पदक भी प्रदान किए जाएंगे। एमए इतिहास में आकाश पटेल को स्वर्ण, अमित कुमार को रजत और उत्तम को कांस्य पदक मिलेगा। एमए अर्थशास्त्र में साक्षी गुप्ता को स्वर्ण, दिव्या त्रिपाठी को रजत तथा अमन सिंह को कांस्य पदक से सम्मानित किया जाएगा।

एमए हिंदी में अनामिका को स्वर्ण, आयुषीदीप वर्मा को रजत और नेहा गुप्ता को कांस्य पदक मिलेगा। वहीं दृष्टिबाधित श्रेणी में पूजा सागर और राना प्रताप को स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। एमए राजनीति विज्ञान में राम अनुज को स्वर्ण, सृष्टी चौधरी को रजत और रिचा पांडेय को कांस्य पदक मिलेगा। दिव्यांग श्रेणी में राम अनुज और गौरव वर्मा को भी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा।

मेधावियों की जुबानी: मेहनत, अनुशासन और सपनों ने दिलाया सम्मान

मुख्यमंत्री के हाथों स्वर्ण पदक मिलेगा, बेहद उत्साहित हूं : मानसी
स्नातक बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) की छात्रा मानसी सिंह को मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक मिलेगा। वह कहती हैं कि यह पल उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। उनकी सफलता का आधार मेहनत, अनुशासन और लगातार सीखने की इच्छा रही है। आगे वह कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स कर सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती हैं।

शॉर्टकट नहीं, मेहनत ही सफलता का रास्ता : श्रद्धा

बीटेक ईसीई की छात्रा श्रद्धा सिंह पटेल को एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक मिलेगा। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देती हैं। उनका कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, निरंतर मेहनत ही मंजिल तक पहुंचाती है। उनका सपना अपने माता-पिता का नाम रोशन करना है।

यूट्यूब और चैटजीपीटी ने भी पढ़ाई में की मदद : आयुषी
एमएससी सांख्यिकी की छात्रा आयुषी विश्वकर्मा को कुलाध्यक्ष रजत पदक मिलेगा। वह बताती हैं कि शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग के साथ कठिन विषयों को समझने में यूट्यूब और चैटजीपीटी जैसे ऑनलाइन संसाधनों ने भी अहम भूमिका निभाई। उनका मानना है कि लगातार मेहनत ही बेहतर परिणाम की कुंजी है।

डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहता हूं : आकाश

परास्नातक में स्वर्ण पदक पाने वाले आकाश पटेल का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है और अब जेआरएफ की तैयारी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि माता-पिता का सपना पूरा करने और पीएचडी करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उनका संदेश है कि लगन और समर्पण से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

निरंतर मेहनत ने दिलाई पहचान : पूजा
एमए हिंदी में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली पूजा सागर ने गोरखपुर और लखनऊ के संस्थानों से उच्च शिक्षा हासिल की है। अब तक उन्हें चार पदक मिल चुके हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और साथियों को देती हैं और मानती हैं कि लगातार मेहनत ही सफलता की असली पूंजी है।

पांच स्वर्ण पदक जीत शिक्षक बन देश सेवा का संकल्प : इरशाद

बीएड के छात्र इरशाद आलम को पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह में शकुंतला मिश्रा स्मृति और रोहित मित्तल स्मृति पदक समेत कुल पांच स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया जाएगा। किसान पिता मुर्तजा हुसैन और गृहिणी मां हाजरा खातून के पुत्र इरशाद अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं। उनका कहना है कि भविष्य में शिक्षक बनकर समाज और देश के विकास में अपनी सार्थक भूमिका निभाना ही उनका लक्ष्य है।
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— इरशाद आलम, बीएड, पांच स्वर्ण पदक विजेता
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