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सड़क की गुणवता जांचने को रात में डीएम ने मारा छापा

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गोंडा। जिले में बन रही लखनऊ-गोंडा फोरलेन सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए एक बार फिर जिलाधिकारी कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव ने शुक्रवार की आधी रात को छापेमारी की। इस दौरान उन्होेंने दुुखहरणनाथ मंदिर के पास चल रहे ढलाई कार्य से लोहे के छह बाक्सों में गिट्टी व मौरंग का वह सैंपल भरवाया, जिसका प्रयोग सड़क बनाने के लिए किया जा रहा है। सैंपल को सुबह जांच के लिए राजधानी भेज दिया गया है। छापेमारी के दौरान उनके साथ सिटी मजिस्ट्रेेट पीडी गुप्ता भी मौजूद रहे।
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सीमेंटेड सड़कें अगर ठीक से बनें तो उनकी उम्र डामरयुक्त सड़कोें से कहीं ज्यादा होती है। यही वजह है कि सरकार डामरयुक्त सड़कोें की जगह सीमेंटेड सड़कोें को ज्यादा तरजीह दे रही है। लेकिन शहर क्या पूरे जिले का यह हाल है कि जहां-जहां भी सीमेंटेड सड़कें बनीं, वह तीन महीने से ज्यादा नहीं टिक सकीं। गुणवत्ता में खेल और उनकी देखरेख न होने से जहां वाहनों की आवाजाही सड़कोें पर हुई सीमेंट-बालू हवा में धूल बनकर उड़ गई तो मौरंग की छर्रियां लोगों के लिए आज भी परेशानी का सबब बनी हुई हैं। ऐसे में कहीं यह हाल करोड़ों रुपये से बन रही गोंडा-लखनऊ फोरलेन रोड का न हो, इसके लिए इस पर हर किसी की निगाह गड़ी हुई है।
इस सड़क की दुुखहरणनाथ मंदिर के समीप हो रही ढलाई का जायजा लेने शुक्रवार की आधी रात जिलाधिकारी कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव सिटी मजिस्ट्रेेट पीडी गुप्ता के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपने सामने लोहे के छह बॉक्सों में इसका सैंपल भरवाया। जिलाधिकारी प्रभांशु श्रीवास्तव ने बताया कि जो सैंपल लिया गया है, उसे जांच के लिए शनिवार को सुबह राजधानी भेज दिया गया। जहां टेक्निकल कमेटी इसकी जांच करके अपनी रिपोर्ट देगी। अगर जांच रिपोर्ट में कुछ भी गलत मिलता है तो दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर की बाकी सीमेंटेड रोडों के सवाल पर जिलाधिकारी ने कहा कि जहां-जहां भी इस तरह की सड़कें बनी हैं, उन सबकी जांच होगी। जिसमें दोषी चाहे लोक निर्माण विभाग के लोग हों या फिर किसी एजेंसी के, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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