लखनऊ। जिन नन्हे हाथों ने उम्र से पहले जिम्मेदारियों का बोझ उठाया, उनके जीवन में अब नई उम्मीदों की रोशनी दिखाई देने लगी है। चाय की दुकान, ढाबा, रेस्टोरेंट व अन्य जगहों पर लंबे समय से काम कर रहे बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में शुक्रवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की ओर से हुए विशेष आयोजन में राजधानी व आसपास के करीब ऐसे 150 बच्चों को सम्मानित कर उनके बेहतर भविष्य की नींव रखी गई।
लखनऊ में बाल श्रम पर काम कर रहीं उजमा ने बताया कि इस वर्ष 12 से 17 वर्ष के 36 बच्चों को मुक्त कराकर शिक्षा से जोड़ा गया। श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने इस पहल की सराहना की और बच्चों को सम्मानित किया। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकहीन या आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है। कानपुर मंडल से आयुषी गुप्ता और समृद्ध यादव को मंत्री ने आर्थिक मदद दी। आयुषी ने बताया कि माता-पिता के देहांत के बाद मौसी ने पालन-पोषण किया। समृद्ध के पिता दिव्यांग हैं और दादा देखभाल करते हैं। विभाग की मदद से उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला मिला।
बाल श्रम मुक्त प्रदेश का लक्ष्य श्रम एवं सेवायोजन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर स्टॉल लगाए। कानपुर, हरदोई और कौशांबी जैसे जिलों के स्टॉलों पर बाल श्रम मुक्त पंचायतों की जानकारी दी गई। विभाग ने दिसंबर 2026 तक प्रदेश के 15 जिलों में 162 पंचायत क्षेत्रों को बाल श्रम मुक्त करने का दावा किया। वर्ष 2027 तक पूरे प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की तैयारी है। मोहनलालगंज स्थित अटल आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी उनकी बेहतर पढ़ाई के लिए सम्मानित किया गया।लखनऊ। जिन नन्हे हाथों ने उम्र से पहले जिम्मेदारियों का बोझ उठाया, उनके जीवन में अब नई उम्मीदों की रोशनी दिखाई देने लगी है। चाय की दुकान, ढाबा, रेस्टोरेंट व अन्य जगहों पर लंबे समय से काम कर रहे बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में शुक्रवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की ओर से हुए विशेष आयोजन में राजधानी व आसपास के करीब ऐसे 150 बच्चों को सम्मानित कर उनके बेहतर भविष्य की नींव रखी गई।