कागजों पर सिमट गई जल प्रदूषण रोकने की मुहिम
- जिले से होकर निकली गंगा व सई में गिराया जाता नालों का पानी
जलकुंभी उग आई, पर साफ-सफाई के नाम पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। वैसे तो अक्सर प्रदूषण रोकने के लिए दावे तो बहुत किए जाते, लेकिन यह कागजों तक सीमित रह गए हैं। जल प्रदूषण रोकने की मुहिम में तेजी नहीं लाई जा रही है। बशर्ते जल प्रदूषण बढ़ रहा है। पानी दूषित होने की वजह से आए दिन मछलियों के मरने के मामले भी सामने आ रहे हैं, लेकिन इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
जिले से होकर पति पावनी गंगा और सई नदी गुजरी है। मौैजूदा समय की बात करें तो खासकर शहर से सटी होकर निकली सई नदी उपेक्षा का शिकार है। जलकुंभी उग आई है। पानी दूषित है। उससे शहर के नाले का पानी जा रहा है। गंगा नदी में भी नालों का पानी गिराया जा रहा है। इससे इन नदियों का पानी दूषित हो रहा है। पर जिला प्रशासन के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यही नहीं जिले के जनप्रतिनिधि भी इसको लेकर चुप्पी साधे हैं। इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इन नदियों का पानी और प्रदूषित हो जाएगा।
इनसेट
50 क्विंटल मर गई मछलियां
डलमऊ (रायबरेली)। गंगा से होकर गंग नहर निकली है। पानी दूषित होेने के कारण चार दिनों में अब तक 50 क्विंटल मछलियां मर गई हैं। इससे बदबू की वजह से मोहल्ला चौहट्टा के रहने वाले नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। रमेश पांडेय, अमरेश कुमार, बिंदा श्रीवास्तव, अंबिका कौशल आदि कहते हैं कि गंगा को साफ-सुथरा बनाने के नाम पर खानापूरी की जा रही है। नालों का पानी गंगा नदी में गिराया जाना बंद किया जाए। घाटों की साफ-सफाई बेहतर ढंग से कराई जाए। पानी दूषित होने से मछलियां मर रही हैं।