सहमे रहे बेनी माधवपुर के बाशिंदे, मगर वन विभाग के पिंजड़े के पास भी नहीं फटक रहा तेंदुआ
सरैंया (सीतापुर)। सदरपुर क्षेत्र में मौजूद तेंदुआ बेहद शातिर और चालाक है। शायद यही वजह है कि वह रात भर इधर-उधर चहलकदमी करता रहा। लेकिन वन विभाग के लगाए गए पिंजड़े के करीब भी नहीं फटका। जबकि पिंजड़े में मौजूद बकरी रात भर चिल्लाती रही।
तेंदुए का हाल यह रहा है कि देर रात उसने नहर के अंदर से कई बार दहाड़ लगाई। जिसे सुनकर क्षेत्र के बाशिंदे कांप उठे। सदरपुर क्षेत्र के संसारपुर व बेनी माधवपुर के निकट तेंदुआ देखा जाता रहा है। इस वजह से वन विभाग ने बेनी माधवपुर के निकट पिंजड़ा लगा रखा है।
तेंदुआ पिंजड़े में मौजूद एक बकरे को चट कर गया, तो वन विभाग को उसे लालच देने के लिए दूसरी बकरी का इंतजाम करना पड़ा। सोमवार की रात बकरी को पिंजड़े में ही बांधा गया था। ताकि तेंदुआ उसकी खुशबू पाकर पिंजड़े में पहुंचे और वन विभाग उसे कैद कर ले।
पिंजड़े में मौजूद बकरी रात भर चिल्लाती रही, उसकी रखवाली में बैठे वनकर्मी भी रातभर जागते रहे लेकिन तेंदुआ पिंजड़े के करीब भी नही फटका। जबकि वह बेनी माधवपुर के निकट चहलकदमी करता रहा। देर रात जब तेंदुआ ने नहर के अंदर दहाड़ लगाई, तब पूरा इलाका गूंज उठा।
उसकी दहाड़ सुनकर क्षेत्र के बाशिंदे सहम गए। सभी अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो उठे। उधर पिंजड़े में मौजूद बकरी भी उसकी दहाड़ सुनकर खामोश हो गई। वनकर्मियों को लगा कि तेंदुआ दहाड़ा है, तो वह भूखा होगा और वह पिंजड़े में मौजूद बकरी को खाने आएगा। लेकिन वह पिंजड़े की तरफ गया ही नहीं।
इधर मंगलवार की सुबह क्षेत्र के बाशिंदों ने बेनी माधवपुर के निकट ही एक गन्ने के खेत के करीब सियार के अवशेष देखे हैं। इससे ग्रामीणों को संदेह है कि तेंदुआ ने सियार को शिकार बनाकर अपनी भूख शांत की है।
अब नहीं बोलते सियार, गायब हैं वनरोज
सदरपुर क्षेत्र के बाशिंदों की मानें तो पहले यह पूरा क्षेत्र सांझ ढलते ही सियारों की आवाज से गूंज उठता था। खेतों से सियारों की आवाज खूब आती थी, लेकिन अब वो आवाज खामोश सी हो गई है। वहीं किसानों को वनरोजों से फसल के नुकसान का भय रहता था, पर अब वनरोज भी इस क्षेत्र में नजर नहीं आ रहे हैं।
क्षेत्र के बाशिंदों ने संदेह जताया है कि या तो तेंदुआ इस क्षेत्र में मौजूद सियार व वनरोजों को मारकर खा गया है। या फिर ये सारे जानवर तेंदुआ की दहशत से इस क्षेत्र को छोड़कर कहीं और चले गए हैं।
इस बार पिजड़े में बांधी गई है बकरी
तेंदुआ पहले एक बार पिंजड़े में मौजूद बकरे को निवाला बना चुका है। तेंदुए के इस शिकार ने वन विभाग की सक्रियता की खूब फजीहत कराई थी। जिसके बाद वन विभाग ने अब पिंजड़े में बकरी बांध रखी है। वन विभाग को भय है कि कहीं ऐसा न हो कि तेंदुआ फिर से पिंजड़े में मौजूद बकरी को न खा जाए।
इससे वनकर्मियों को फजीहत का भय सता रहा है। इस वजह से उनका प्रयास है कि तेंदुआ किसी भी तरह से बकरी को खाकर निकल भागने न पाए। उसे काबू में करने के लिए वनकर्मी रात दिन एक किए हुए हैं।
ग्रामीणों की उड़ गई नींदें
सदरपुर में तेंदुए ने क्षेत्र के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। वजह यह है कि जनवरी माह से तेंदुआ चहलकदमी कर रहा है। कभी वह गांव के करीब तो कभी खेतों में नजर आ रहा है। नहर पटरी तो उसकी आरामगाह बन गई है। अधिकतर ग्रामीणों ने उसे नहर पटरी पर ही चहलकदमी करते हुए देखा है।
वन विभाग तमाम प्रयासों के बावजूद भी तेंदुआ को काबू में नहीं ला सका है। यही वजह है कि क्षेत्र के बाशिंदों को भय है कि न जाने कब और किस वक्त तेंदुए से उनका सामना हो जाए। इतना ही नहीं लोगों को भय यहां तक है कि कहीं तेंदुआ आबादी में न आ जाए। यही वजह है कि लोगों के दिन का चैन व रात की नींद उड़ी हुई है।