अब तक जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या 13 से बढ़कर 14 हुई
सीतापुर। आदमखोर कुत्तों के हमले से जख्मी बालिका ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना से कुत्तों के हमले से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या 13 से बढ़कर 14 हो गई है। कुत्तों का आतंक इस कदर है कि मासूमों की मौतों व घायलों का आंकड़ा दिन ब दिन भयावह होता जा रहा है।
इतनी मौतों के बावजूद अभी तक प्रशासन कुत्तों पर अंकुश नहीं लगा पाया है। इससे अब भी मासूमों पर हमलों की संभावना बनी हुई है। मानपुर के ग्राम खैरमपुर निवासी छोटेलाल की पुत्री सोनम (10) गुरुवार को गांव के बाहर बाग में नित्यक्रिया को गई थी।
इसी बीच कुत्तों के झुंड ने उसके ऊपर हमला बोला था। जिसकी वजह से बालिका गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिवार के सदस्यों ने बालिका को नाजुक हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर शुक्रवार को बालिका ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
अफसोस जनक बात तो यह है कि नवंबर 2017 से कुत्तों का हमला मासूमों पर जारी है। छह माह बीत चुके हैं, 14 बच्चे बेमौत मारे जा चुके हैं। 29 बच्चे घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक जिले में आ चुके हैं। जिन्होंने कुत्तों के आतंक पर रोक लगाने की बात कही थी।
बावजूद इसके हमले अब भी जारी हैं। न तो कुत्तों के हमले रुके हैं, न ही मासूमों के घायल होने व मरने का सिलसिला। कुल मिलाकर लोग दहशत में हैं, जिम्मेदार कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रहे हैं और मासूम बेमौत काल के गाल में समाते जा रहे हैं।
सांस नली में अवरोध से हुई मौत
सूत्र बताते हैं कि आदमखोर कुत्ते के हमले से घायल होने वाली बालिका की मौत सांस नली में अवरोध की वजह से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है।
होशियार, खबरदार : कैसी जागरूकता और कैसी कांबिंग
सीतापुर। आदमखोर कुत्ते भले ही मानवता को झकझोर देने वाली घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, मासूम घरों में दुबके हुए हैं, लोग भयभीत हैं। बावजूद इसके प्रशासन का आदमखोरों से निपटने का तरीका बेहद शर्मसार करने वाला है।
ऐसा लग रहा है कि जैसे आदमखोरों कुत्तों के आगे पूरे सिस्टम ने हथियार डाल दिए हों। कुत्तों को मारना तो बहुत दूर की बात है, उन्हें पकड़ने में भी कोई खास तेजी नजर नहीं आ रही है। खूंखार कुत्तों से निपटने की तैयारियों पर अगर ध्यान दें तो प्रशासन महज जागरूकता अभियान चलाता नजर आ रहा है।
जिसमें ढोल नंगाड़े लेकर प्रशासनिक अमला गांव के गली कूचों में लोगों को आदमखोर कुत्तों से सचेत करता नजर आ रहा है। हालत यह है कि जो लोग आदमखोर कुत्तों के प्रति लोगों को सचेत कर रहे हैं, अगर दुर्भाग्यवश इन टीमों का सामना आदमखोर कुत्तों से हो जाए, तो इन टीमों के पास कुत्तों से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
या तो ये टीमें भागकर जान बचाए या फिर खुद को ही नुचवा डालें। ऐसे में स्थिति साफ है कि आखिर प्रशासन कैसे इन आदमखोरों से निपट रहा है। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है, कि आखिर जिन आदमखोरों को या तो मार देना चाहिए या फिर पकड़ा जाना चाहिए।
उन पर अंकुश लगाने के बजाय लोगों से यह कहा जा रहा है कि होशियार रहो, सावधान रहो। कुत्तों को पकड़ने व उन्हें ठिकाने लगाने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।