बलरामपुर। केंद्रीय मार्ग निधि से जिले में तुलसीपुर से नेपाल कोयलाबास को जोड़ने वाली 24.60 किमी सड़क के निर्माण के लिए 56.90 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सड़क निर्माण के लिए 8.41 करोड़ रुपये की पहली किस्त लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड बलरामपुर को मिल गई है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चार मीटर चौड़ी यह सड़क अब सात मीटर चौड़ी बनेगी।
कोयलाबास नेपाल का करीब तीन दशक पूर्व व्यापारिक नगर था। माओवादी हमले तथा भूस्खलन के कारण यह नगर उजड़ गया था। यहां के तमाम व्यापारी भारत के तुलसीपुर व अन्य जगहों पर आकर बस गए हैं। कोयलाबास को नेपाल के दांग जिले को जोड़ने वाली सड़क का पुल टूट जाने से आवागमन भी ठप हो गया था। बीते वर्षों में नया पुल के निर्माण कर नेपाल सरकार ने कोयलाबास-दांग बस सेवा शुरू कर दी है। नगर भी धीरे-धीरे आबाद हो रहा है। कोयलाबास में भारतीय पर्यटकों का आवागमन भी बढ़ रहा है। झील व पहाड़ की मनोरम वादियां देखने प्रतिदिन सैकड़ों लोग कोयलाबास पहुंच रहे हैं। इसी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए गैसड़ी से भाजपा विधायक शैलेश कुमार सिंह शैलू ने सरकार से तुलसीपुर से कोयलाबास को जोड़ने वाली चार मीटर चौड़ी जर्जर सड़क के नव निर्माण की मांग की थी। विधायक का कहना था कि इस सड़क के बनने से न केवल दोनों देशों के लाखों लोगों को आवागमन में सुविधा होगी, बल्कि इससे कोयलाबास व आसपास के भारतीय क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। शासन ने केंद्रीय मार्ग निधि से इस सड़क के निर्माण की मंजूरी प्रदान कर दी है। चार मीटर चौड़ी 24.60 किमी सड़क अब सात मीटर चौड़ी करने के लिए 56.90 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड बलरामपुर केके मिश्रा ने बताया कि तुलसीपुर-जरवा-कोयलाबास सड़क निर्माण के लिए 56.90 करोड़ के बजट को मंजूरी मिली है। प्रथम किस्त के रूप में 8.41 करोड़ रुपये मिले हैं। टेंडर होते ही सड़क निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
ईको टूरिज्म के साथ जंगल व सीमा की निगरानी में भी होगा फायदा
तुलसीपुर से नेपाल के कोयलाबास को जोड़ने वाली सड़क के नव निर्माण से न केवल दोनों देशों के लाखों लोगों को आवागमन का फायदा मिलेगा, बल्कि इससे सोहेलवा संरक्षित वन्य क्षेत्र के जनकपुर व रामपुर रेंज की निगरानी करने में वन विभाग को सहूलियत मिलेगी। एसएसबी 9वीं वाहिनी की नेपाल सीमा चौकी में आने जाने वाले जवानों व अधिकारियों को भी अच्छी सड़क का लाभ मिलेगा। इस सड़क से ईको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। जंगल व पहाड़ी वादियों की सैर करने वाले पर्यटक अच्छी सड़क से यात्रा करेंगे।