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तीन घोड़ों में मिली घातक बीमारी, जहर देकर मारा

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बहराइच/जरवल। जिले के 287 घोड़ों में संदिग्ध ग्लैंडर एवं फारसी बीमारी होने की आशंका पर उनके सीरम को जांच के लिए हरियाणा भेजा गया था। वहां जांच में जरवल के पांच घोड़ों में ग्लैंडर फारसी बीमारी होने का पता चला। लेकिन सीरम रिपोर्ट आने तक दो घोड़ों की मौत हो गई।
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शेष बीमारी से ग्रसित तीन घोड़ों को गुरुवार को चिकित्सकों ने जहर का इंजेक्शन देकर अपने सामने मरवाया। उनके शव को भी दफनवा दिया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि मौसम परिवर्तन के साथ अश्व प्रजाति के मवेशियों में घातक ग्लैंडर फारसी बीमारी फैलती है।

इसकी चपेट में आने से मनुष्य भी संक्रमित हो जाते हैं। इस मामले में पखवारे भर पूर्व सचेत किया गया था। जिले में 287 बीमार घोड़ों का सीरम सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार हरियाणा प्रयोगशाला भेजा गया था। इनमें बहराइच के पांच सैंपल पॉजटिव मिले थे। लेकिन सैंपल रिपोर्ट आने पर पता चला कि दो घोड़ों की पहले मौत हो चुकी है।
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जरवल में तीन जीवित घोड़े होने की पुष्टि हुई। यह घोड़े जरवल निवासी इरफान, सिंकदर व एक अन्य व्यक्ति के यहां पाए गए। सीवीओ ने बताया कि गुरुवार को जरवल के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना के साथ मौके पर पहुंचकर तीनों बीमार घोड़ों को जहर का इंजेक्शन लगाकर मार दिया गया। शवों को भी सुरक्षित दफनवा दिया गया है।

निरीक्षण कर किया जागरूक, लगाया शिविर
तीन घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देने के बाद सीवीओ व जरवल के चिकित्सकों ने जरवल में स्थित पशु चिकित्सालय का निरीक्षण किया। उन्होंने कस्बे के निकट स्थित अब्बास ब्रिक फील्ड पर जाकर घोड़े व खच्चर की जांच की।

लोगों को जागरूक किया। सैंपल लेकर टेस्ट के लिए भेजा। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना को निर्देश दिया कि ग्राम पारा परशुरामपुर, नेवलीपारा में मुंहपका, खुरपका बीमारी से बचाव के लिए मवेशियों का टीकाकरण करवाएं।

ग्लैंडर फारसी से मनुष्यों में होता संक्रमण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि ग्लैंडर फारसी बीमारी के विषाणु मनुष्य और पशुओं में फैलने पर मुंह में छाले पड़ना, तेज बुखार होना, उल्टी-दस्त की शिकायत आदि की समस्याएं आती हैं। इस बीमारी का कोई टीका भी नहीं है न ही कोई उपचार है।
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