प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। इसके अंतर्गत आवासीय सुविधा के साथ नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण और सुनिश्चित सेवायोजन की सुविधा दी जाती है।
प्रदेश सरकार राज्य में कौशल विकास को काफी तेजी से गति दे रही है। बीते आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने प्रदेश के 14 लाख से अधिक युवक व युवतियों को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया। इनमें से 5.65 लाख से अधिक युवा रोजगार व स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बने हैं।
विज्ञापन
प्रदेश के हर क्षेत्र के युवाओं को उनके रुचि व क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार अल्पकालीन प्रशिक्षण देने के लिए मिशन ने 1000 से अधिक ट्रेनिंग पार्टनर को जोड़ा है। इनके माध्यम से 350 से अधिक कोर्स चलाए जा रहे हैं, जो उद्योगों की मांग के अनुसार डिजाइन किए गए हैं। इससे न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि युवाओं का औद्योगिक दुनिया से सीधा जुड़ाव भी हुआ है।
इसी क्रम में कौशल विकास मिशन ने फ्लेक्सी ट्रेनिंग पार्टनर योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत अब तक 33 औद्योगिक इकाइयों को अनुबंधित किया गया है। मिशन का लक्ष्य है कि हर जिले से 5 नई इकाइयों को जोड़कर उद्योगों की संख्या को और बढ़ाया जाए। हाल ही में इस दिशा में 11 नई इकाइयों के साथ अनुबंध किए गए हैं।
विज्ञापन
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। इसके अंतर्गत आवासीय सुविधा के साथ नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण और सुनिश्चित सेवायोजन की सुविधा दी जाती है। बीते आठ वर्षों में करीब 1.80 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण और उनमें से 1.30 लाख को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसी तरह अब तक 1736 रोजगार मेलों के माध्यम से 4.13 लाख से अधिक युवाओं को 2537 कंपनियों में रोजगार दिलाया गया है।