बाराबंकी। क्षेत्र पंचायतों को मनरेगा के तहत कार्य कराने को लेकर दिए गए प्रस्तावों पर कार्यवाही न होने से जहां ब्लॉक प्रमुखों में इसके प्रति गुस्सा है, वहीं शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इस पर ध्यान न दिए जाने से सरकार को बदनाम करने की साजिश से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। शासन स्तर से भी कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिल रहे हैं। सांसद प्रियंका सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई दिशा की बैठक में प्रमुखों की खाली पड़ी कुर्सियां काफी कुुछ बयां कर रही थीं।
मनरेगा के तहत कई ब्लॉक प्रमुखों ने अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रस्तावों को तैयार कर उपायुक्त मनरेगा कार्यालय को भेजा था। लेकिन विभाग द्वारा एक भी प्रस्ताव नियम संगत न बताते हुए उस पर आपत्ति लगा दी। पिछले डेढ़ साल से एक भी कार्य क्षेत्र पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत नहीं कराया गया, जिससे प्रमुखों में नाराजगी है। शुक्रवार को सांसद प्रियंका सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में जैदपुर विधायक उपेंद्र रावत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। बताया गया कि मसौली व पूरेडलई ब्लॉक से मनरेगा के तहत 22 प्रस्ताव कार्यालय को भेजे गए, जिसमें अधिकारी द्वारा यह कह कर आपत्ति लगा दी गई कि यह प्रस्ताव नियम संगत नहीं हैं।
बीडीओ कर रहे हस्तक्षेप
क्षेत्र पंचायतों को विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कराने में बीडीओ भी रोड़ा बन रहे हैं। आलम यह है कि बीडीओ प्रस्ताव बनाकर विभाग को नहीं भेज रहे हैं। कई बार प्रमुुखों ने जिला मुख्यालय से लेकर शासन स्तर तक पत्राचार भी कर चुके हैं।
प्रमुुख संघ ने चार माह पूर्व की थी डीएम से शिकायत
जिले में 15 विकास खंड हैं। इन विकास खंडों के ब्लॉक प्रमुखों ने अपने संघ के पदाधिकारियों के साथ तत्कालीन डीएम अखिलेश तिवारी से मिलकर इस मामले का निस्तारण करने की मांग भी की थी, लेकिन इस मामले का हल आज तक नहीं हुआ। प्रमुख संघ सीडीओ को भी इससे अवगत करा चुका है।
पूर्व में जो प्रस्ताव प्रमुखों के आए थे। वह नियम संगत नहीं थे। नियमानुसार ब्लॉक से वहीं कार्य लिए जा सकते हैं , जो दो या उससे अधिक ग्रामों को जोड़ने वाले हो। प्रमुखों के प्रस्ताव गाइड लाइन के अनुसार आएंगे तो उन पर कार्य कराएं जाएंगे।
- अंजनी कुमार सिंह, सीडीओ