जरवल (बहराइच)। कालिया और राजू नाम के घोड़ों को सोमवार को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया। हरियाणा भेजे गए सीरम की जांच में घातक बीमारी ग्लैंडर फारसी की पुष्टि हुई। इसके बाद पशु चिकित्सकों ने घोड़ों को जहर का इंजेक्शन दिया। दो घंटे में ही दोनों घोड़ों ने दम तोड़ दिया। इसके बाद पशु चिकित्सकों ने दोनों को दफनवा दिया।
जरवल विकासखंड के ग्राम पंचायत बंभौरा के बाहर ईंट-भट्ठा है। भट्ठे पर घोड़े माल ढोने के लिए लगे हुए हैं। जरवल पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि यहां के 25 पशुओं का सीरम जांच के लिए हरियाणा के हिसार प्रयोगशाला भेजा गया था।
जांच रिपोर्ट में दो घोड़ों में ग्लैंडर फारसी बीमारी होने की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवंत सिंह को भेजी गई। सीवीओ के निर्देश पर सोमवार को डॉ. राजीव सक्सेना की अगुवाई में फखरपुर के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल पाल व कुंडासर के डॉ. अनुराग यादव की अगुवाई में टीम गांव पहुंची।
भट्ठे पर काम कर रहे गांव निवासी रहीश के घोड़ों को पकड़कर दर्द निवारक इंजेक्शन दिया। इसके बाद दोनों घोड़ों को जहर का इंजेक्शन लगाया गया। दो घंटे बाद घोड़ों की मौत हो गई। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने घोड़ों को जमीन में दफनवा दिया।
25 हजार मिलेगा मुआवजा
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव ने बताया कि जरवल विकास खंड से प्रति माह 20-25 सीरम जांच के लिए हरियाणा भेजी जा रही है। जांच में अगर सीरम पॉजिटिव मिलती है तो उन घोड़ों को मार दिया जाता है।
पशुओं से दूर रहे ग्रामीण
डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि ग्लैंडर फारसी बीमारी संक्रमित है। यह बीमारी घोड़ों में तेजी से फैल रही है। ग्रामीण इन पशुओं से दूर रहें। चपेट में आने से व्यक्ति भी बीमार हो सकता है।