बछरावां (रायबरेली)। थाना क्षेत्र के गोझवा मनाखेड़ा मजरे बिशनपुर गांव में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बछरावां में उस समय हड़कंप मच गया, जब बुधवार की रात तीन छात्राएं दीवार फांदकर भाग गईं। रात में ही खोजबीन की गई तो दो छात्राएं तीन किमी दूर मिल गईं, जबकि तीसरी छात्रा का पता गुरुवार को सुबह चल सका। यह छात्रा करीब 20 किमी दूर पड़ोसी जिले लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के एक गांव में मिली। रात में ही छात्रा के लापता होने की सूचना बछरावां थाने में दर्ज करा दी गई थी, जिससे पुलिस भी छानबीन में जुटी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी शिवहरि मीणा भी देर रात स्कूल पहुंचे। छात्राओं ने बताया कि उन्हें मां की याद आ रही थी। छुट्टी नहीं मिल रही थी, जिससे वे घर जाने के लिए स्कूल से भागी थीं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बछरावां में नए शैक्षिक सत्र में कुंडौली गांव की रहने वाली तीन बालिकाओं ज्योति (12), सलोनी (10) और रिंका (12) का कक्षा छह में प्रवेश हुआ था। इस स्कूल में कुल 90 छात्राएं अध्ययनरत हैं। बुधवार देर शाम करीब आठ बजे तीनों छात्राएं विद्यालय परिसर में खेल रही थीं, तभी मौका देखकर वह चारदीवारी फांदकर भाग निकलीं। कुछ ही देर में छात्राओं के भागने की जानकारी विद्यालय स्टाफ को हुई तो उनकी तलाश शुरू कर दी गई। खोजबीन के दौरान रात 10.30 बजे दो छात्राएं ज्योति और सलोनी करीब तीन किमी दूर इसिया गांव के पास मिल र्गइं, लेकिन तीसरी छात्रा प्रियंका का पता नहीं चल सका। इस पर वार्डेन ने डायल 100 को सूचना दी।
बछरावां थानाध्यक्ष जीडी शुक्ला टीम के साथ विद्यालय पहुंचे और स्कूल स्टाफ के साथ खोजबीन में मदद की। घटना की सूचना पर एसपी भी रात में ही करीब 11 बजे बछरावां पहुंचे। पूरी रात खोजबीन की गई। गुरुवार सुबह जानकारी मिली कि छात्रा प्रियंका लखनऊ के निगोहा थाना क्षेत्र के रघुनाथ खेड़ा में है, जो कि स्कूल से करीब 20 किमी दूर है। वहां के एक ग्रामीण ने फोन कर छात्रा के गांव कुंडौली में जानकारी दी थी। छात्रा को वापस लाया गया। यह छात्रा पैदल ही पूरी रात राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए 20 किमी का रास्ता तय करके रघुनाथ खेड़ा पहुंची थी।
केजीबीवी बछरावां की वार्डेन राधा सोनकर ने कहा कि जिस वक्त बालिकाएं विद्यालय से गायब हुईं, उस वक्त वह स्कूल में ही थीं। छात्राएं दीवार फांदकर अचानक बाहर निकल कर भाग गईं। जैसे ही खबर लगी, तुरंत पुलिस को सूचना देने के बाद खुद भी स्टॉफ के साथ खोजबीन शुरू कर दी।
इसे विद्यालय की सख्ती कहें या फिर लापरवाही
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से भागी तीन छात्राओं के मामले में विद्यालय की लापरवाही कहें या फिर सख्ती। जो भी हो, छात्राओं का इस तरह भागना गंभीर बात है। इससे स्कूल की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्राओं ने बताया कि उन्हें मां की याद आ रही थी। घर जाने के लिए छुट्टी नहीं मिल रही थी। इसीलिए भागने की कोशिश की। हालांकि छात्राओं के भागने की लगते ही उनके परिवारीजन भी विद्यालय पहुंच गए थे।