बाराबंकी। मनरेगा में इस वित्तीय वर्ष में 35 लाख 47 हजार मानव दिवस सृजित किए जाने का लक्ष्य विभाग को दिया गया है। मनरेगा के तहत विकास कार्य कराकर जॉबकार्ड धारकों को ज्यादा से ज्यादा काम मिल सके, इसके लिए 140 करोड़ के बजट की मांग भी शासन से की गई है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार करीब चार लाख मानव दिवस सृजित करने का अतिरिक्त लक्ष्य मिला है।
ग्रामीण अंचलों के मजदूरी पेशा लोगों को उन्हीं के गांव में सौ दिनों का रोजगार मुहैया कराए जाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा में जिले को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 35 लाख 47 हजार मानव दिवस सृजित किए जाने का लक्ष्य केंद्र सरकार के निर्देश पर शासन की ओर से दिया गया है। पिछले वर्ष 31 लाख 71 हजार मानव दिवस का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें पंजीकृत साढ़े चार लाख जॉबकार्ड धारकों में से एक्टिव दो लाख 40 हजार जॉबकार्ड धारकों को रोजगार मुहैया कराया गया था। विभाग ने योजना के तहत जिले भर मेें तालाबों की खुदाई, नहर सफाई, आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, चकमार्ग, कच्ची पटाई आदि के कार्य कराकर जॉबकार्ड धारकों को सौ दिनों का रोजगार दिया है।
शुरू हुए वित्तीय वर्ष में अत्यधिक जॉबकार्ड धारकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए विभाग ने केंद्र सरकार से एक अरब 40 करोड़ के बजट की मांग की है। जिसके सापेक्ष विभाग को करीब 103 करोड़ का बजट मिलने की बात जिम्मेदार अधिकारी कह रहे हैं। पिछले वर्ष सौ करोड़ की डिमांड के सापेक्ष 92 करोड़ की धनराशि विभाग को प्राप्त हुई थी।
जल्द मिलेगी बकाया राशि
मनरेगा के तहत लक्ष्य पूरा होने के बाद भी जॉबकार्डधारकों से कराए गए कार्यों का बकाया पांच करोड़ की धनराशि की मांग भी की गई है। जो इस वित्तीय वर्ष में मिलने की बात अधिकारी कह रहे हैं। बजट मिलते ही बकाए का भुगतान मजदूरों को किया जाएगा।
सरकार ने इस बार मनरेगा के लक्ष्य में बढ़ोत्तरी कर दी है। जिससे अधिक से अधिक जॉबकार्ड धारकों को काम मिल सके। विभाग की ओर से भी 140 करोड़ की डिमांड भेजी जा चुकी है। बजट मिलते ही कार्ययोजना के अनुसार परियोजनाएं शुरू कर दी जाएंगी।
- अरुण कुमार, डीसी मनरेगा