फैजाबाद। अयोध्या को धर्मनगरी व पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने की योजना परवान चढ़ने की ओर है। विभिन्न विभागों की ओर से अयोध्या के विकास को लेकर इस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं। सभी विभागों की प्राथमिकता मूलभूत सुविधाओं की ओर है। जल निगम ने अयोध्या की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अमृत योजना के तहत 16.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही योजना में बजट का आवंटन हो जाएगा। रामनगरी में पाइप लाइन बिछाने और भूमिगत जलाशयों के बन जाने से लोगों को आसानी से शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा।
अयोध्या में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वर्ष 2009 से लेकर 2011 के बीच पेयजल पाइप लाइन डाली गई थी। इसमें ओवर हेड टैंक, भूमिगत जलाशय भी बनाए गए थे। पूरी योजना में लगभग 741 लाख से अधिक की धनराशि खर्च हुई थी। अब जल निगम ने एक बार फिर से नई विकसित कॉलोनियों व छूटे मोहल्लों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पाइप लाइन बिछाने की योजना बनाई है। अमृत योजना के तहत खास तौर पर विद्याकुंड, हनुमान कुंड, रायगंज, सीताकुंड, कजियाना, रानोपाली व गोलाघाट वार्ड सहित कई स्थानों पर 30 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसके साथ ही नए भूमिगत जलाशय बनाए जाने की योजना है। यह भूमिगत जलाशय अशर्फी भवन, जलकल कैंपस व अयोध्या स्टेशन रोड पर बनाए जाएंगे। योजना का प्रस्ताव अमृत पेयजल योजना के तहत शासन को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि फैजाबाद की तरह अयोध्या में भी पाइप लाइन योजना के लिए जल्द ही बजट का आवंटन हो जाएगा।
प्रोजेक्ट मैनेजर, जल निगम फैजाबाद आरबी श्रीवास्तव ने कहा कि अमृत पेयजल योजना के तहत अयोध्या की पाइप लाइन विस्तार योजना का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। इसमें नई विकसित कॉलोनियों और छूटे मोहल्लों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन डाली जाएगी। साथ ही भूमिगत जलाशय, नलकूप व सभी नलकूपों का ऑटोमेशन होगा।
दुरुस्त कराए जाएंगे खराब पड़े दो नलकूप
मौजूदा समय में अयोध्या की पेयजल व्यवस्था को संचालित करने के लिए 20 नलकूप लगे हुए हैं। दो नलकूप पिछले वर्षों से खराब पड़े हैं। काफी जतन के बाद भी यह दोनों नलकूप दुरुस्त नहीं हो पाए हैं। अब नई योजना के तहत दोनों नलकूपों को नए सिरे से स्थापित किए जाने की तैयारी है। यह दोनों नलकूप जलकल भवन व अशर्फी भवन में स्थापित होंगे। पूरी योजना में सबसे खास बात यह है कि सभी नलकूपों में ऑटोमेशन प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लिए जलकल में कंप्यूटरीकृत रूम बनाया जाएगा। यहीं से स्टाफ के जरिये सभी नलकूप संचालित होंगे। अभी तक सभी नलकूपों पर एक-एक कर्मचारी को नलकूप संचालित करने के लिए लगाया जाता रहा है।