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जंगली जीवों के हमले से बचने को समूहों में निकलें ग्रामीण

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उर्रा (बहराइच)। मानव वन्यजीव संघर्ष पर कतर्नियाघाट सेंक्चुरी से सटे गांवों में अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को वनाधिकारियों और ग्रामीणों की बैठक हुई। अधिकारियों व विशेषज्ञों ने वन और वन्यजीवों की सुरक्षा का पाठ पढ़ाया। ग्रामीणों को सुरक्षित रहने के उपाय भी बताए।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मुर्तिहा रेंज अमृतपुर गांव में दो बच्चों की मौत के बाद वन महकमा जागा है। गांव के लोग बाघ और तेंदुओं से संघर्ष करने की चेतावनी दे चुके हैं। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए विभाग अब डैमेज कंट्रोल की स्थिति में आ गया है। गुरुवार को मुर्तिहा रेंज के प्राथमिक विद्यालय परिसर में ग्रामीणों के साथ वनाधिकारियाें ने बैठक की। अध्यक्षता डीएफओ जीपी सिंह ने व संचालन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने की। बैठक में मौजूद ग्रामीणों से संवाद स्थापित करते हुए डीएफओ ने कहा कि इस समय गन्ना खेत में तैयार है। जिससे बाघ और तेंदुए खेतों में आ रहे हैं। ऐसे में सभी ग्रामीण समूह में खेतों को जाएं। उन्होंने कहा कि जीवों के दिखायी देने पर गोले-पटाखे दागकर उन्हें दूर भगाएं। इसके अलावा डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद पांडेय, वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन, ककरहा रेंजर विकास कुमार अस्थाना, सुजौली के हरिओम श्रीवास्तव आदि ने भी संवाद स्थापित कर बचाव के तरीके बताए। वहीं ग्राम प्रधान अजय कुमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य पंकज श्रीवास्तव, अर्जुन शुक्ला ने जीवों से सुरक्षा की मांग की। इस पर सभी अधिकारियों ने तेंदुओं को पकड़कर जंगल में छोड़ने की बात कही। संवाद कार्यक्रम में कालीचरन, नन्हेंलाल यादव, मकबूल खां, चंद्रशेखर, बलराम, राजकिशोर, रामजी वर्मा आदि मौजूद रहे।
डीएफओ जीपी सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि सेंक्चुरी क्षेत्र में सैकड़ो तेंदुए हैं। सभी को पकड़ा नहीं जा सकता। लेकिन मुर्तिहा रेंज के अमृतपुर गांव में किए गए सर्वेक्षण में एक ही तेंदुए के पदचिन्ह मिले हैं। ग्रामीण बाघ की बात कह रहे हैं, लेकिन बाघ के निशान नहीं पाए गए हैं। सिर्फ एक तेंदुआ हमलावर है। अब तक उसी ने हमले किए हैं। पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
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डीएफओ ने बताया कि डब्ल्यूटीआई के विशेषज्ञ प्रेम कुमार पांडेय की देखरेख में पहले दो पिंजरे लगाए गए थे। दो और पिंजरे बढ़ाए गए हैं। गन्ने के खेत में चार स्थानों पर पिंजरे लगे हैं। उन्होंने कहा कि मूवमेंट जिस स्थान पर मिलेगा, पिंजरा वहीं स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर और पिंजरे लगाए जाएंगे।
प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि तेंदुओं के हमले को रोकने के लिए मोतीपुर, ककरहा तथा धर्मापुर के वन क्षेत्राधिकारी को वनकर्मियों के साथ गश्त के निर्देश दिए गए हैं। तीनों वन क्षेत्राधिकारी आठ-आठ घंटे ड्यूटी कर तेंदुओं के हमले पर नजर रखेंगे।
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