रामपुरभगन में बीईओ ने 12 स्कूलों का किया निरीक्षण
रामपुरभगन (फैजाबाद)। बीकापुर शिक्षा क्षेत्र के रामपुरभगन में खंड शिक्षाधिकारी ने 12 स्कूलों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर ही अवैध रूप से संचालित हो रहे तीन स्कूलों को बंद कराया, वहीं कोचिंग के नाम पर स्कूल चला रहे प्रबंधकों को फटकार लगाई।
चेतावनी देते हुए कहा कि बिना मान्यता के विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों को परिषदीय विद्यालय में सात दिन में प्रवेश कराएं वरना एफ आईआर के लिये तैयार रहें। बीईओ रामतीर्थ वर्मा ने बताया कि संतराम स्मारक विद्यालय सतना में चेकिंग के दौरान अध्यापक बच्चों को छोड़कर भाग गए, इसके कारण बच्चों को घर भेज दिया गया।
विकास पब्लिक स्कूल व आलोक कोचिंग सेंटर रामपुरभगन बिना मान्यता तथा जर्जर मकान में चलने के कारण तत्काल प्रभाव से बंद कराकर बच्चों को घर भेज दिया गया। वहीं, बाला जी शिक्षण संस्थान, आदर्श पब्लिक स्कूल व वीनस इंस्टीट्यूट तथा वीनस इंटर कालेज में मौजूद प्रधानाचार्य व प्रबंधक ने बताया कि मान्यता संबंधी फाइल विभाग में जमा है।
बाबा भगन राय के प्रबंधक ने 1 से 5 तक की मान्यता का कागज दिखाया, जबकि बिना मान्यता के चल रहे 6, 7 व 8 क्लास को बंद कर बच्चों को घर भेजने की बात कही। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इन विद्यालयों को नोटिस रिसीव कराया गया है।
कोचिंग सेंटर बताने वाले प्रबंधकों को सरकारी विद्यालय के समय 8 से 1 बजे तक कोचिंग न चलाने के लिए कहा गया। बताया कि नोटिस देने बावजूद यदि तीन दिन में मान्यता संबंधी कागज नहीं दिखाया जाता है तो बिना मान्यता के स्कूल अथवा कोचिंग चलता पाया गया तो उसके विरुद्ध एफ आईआर दर्ज कराई जाएगी।
बच्चों को बीएसए ने खुद पढ़ाया
अमसिन। बीएसए अमिता सिंह ने गुरुवार को मया ब्लॉक के आधा दर्जन विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में हो रहे पठन-पाठन से लेकर मिड-डे मील, शौचालय आदि का निरीक्षण किया और निर्देश दिया कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुविधा प्राप्त होने में दिक्कत न आए।
इस दौरान उन्होंने बीईओ मया अंजनी कुमार सिंह के साथ प्राथमिक विद्यालय अंकारीपुर, गद्दौपुर, जूनियर हाईस्कूल देवापुर, गंगापुर, शेरवा घाट, श्रृंगी ऋषि का निरीक्षण किया।
निरीक्षण में छात्र उपस्थिति, ड्रेस वितरण, एमडीएम एवं दूध व फल वितरण की स्थिति पर जांच की। उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान बीएसए ने स्वयं बच्चों को पढ़ाया।