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स्कूल भवन जर्जर, बिजली-पानी का इंतजाम नहीं

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बहराइच। प्राथमिक स्कूलों की दुर्दशा पर न्यायालय ने नाराजगी जतायी है। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब तक विभाग की ओर से ऐसा कोई फरमान जारी नहीं हुआ है। जिले के 2470 प्राथमिक विद्यालयों में 4.93 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इनमें आधे से अधिक स्कूल तो ऐस हैं जहां बिजली नहीं है
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।कई स्कूलों के भवन जर्जर हैं तो बाउंड्रीवॉल के अभाव में विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। स्कूल के शिक्षकों ने कई बार आवाज भी उठाई, लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हो सकी है। जिले के प्राथमिक स्कूलों में 5600 शिक्षक व 3200 शिक्षामित्र कार्यरत हैं।

शिक्षण सत्र के शुरुआती दौर में शासन-प्रशासन प्राथमिक विद्यालयों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर संवारने का दम भरते हैं, लेकिन ये तमाम दावे फाइलों में ही सिमट कर रह जाते हैं। बरसात के दिनों में कई स्कूलों की छत टपक रही है तो कहीं हैंडपंप खराब पड़े हैं। आधे से अधिक स्कूल तो ऐसे हैं, जहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं है।
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एक परिसर में चल रहे दो स्कूल
महसी के प्राथमिक विद्यालय एरिया प्रथम का भवन जर्जर है, बाउंड्रीवॉल तक नहीं है। इस विद्यालय में कपरवल प्राथमिक विद्यालय के छात्र भी अध्ययनरत हैं।

कपरवल विद्यालय कटान के कारण नदी में समाहित हो चुका है। स्कूल के बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए लगभग दो लाख रुपये का बजट आया है, लेकिन यह बजट नाकाफी है। इसके चलते शिक्षकों ने खाते से पैसा आहरित नहीं किए हैं। स्कूल में 195 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बिजली का कनेक्शन नहीं है।

बाउंड्रीवॉल है नहीं, हैंडपंप भी खराब
प्राथमिक विद्यालय एरिया द्वितीय में 175 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। लेकिन स्कूल में बाउंड्रीवॉल नहीं है। हैंडपंप लगा जरूर है, लेकिन तीन माह से खराब पड़ा है। शौचालय भी इस्तेमाल करने योग्य नहीं है। बिजली कनेक्शन तक नहीं हुआ है। सिर्फ व्यवस्थाएं घिसटती दिख रही हैं।

बदहाल है शौचालय
विकास खंड नवाबगंज के प्राथमिक विद्यालय पल्टनपुरवा में भी 100 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां बिजली की व्यवस्था नहीं है। न ही बाउंड्रीवॉल बनी है। शिक्षक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि विद्युतीकरण के लिए पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।

कब ढह जाए भवन, भरोसा नहीं
विकास खंड पयागपुर के भूपगंज प्रथ में न तो बाउंड्रीवॉल है और न ही शौचालय दुरुस्त है। स्कूल के एक हिस्से का भवन काफी जर्जर है। इसी में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है। आए दिन छत से प्लास्टर गिरता है। प्रधानाध्यापिका बृजेश कुमारी ने बताया कि कई बार इस मामले में पत्र लिखा गया। लेकिन अब तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है।

खंड शिक्षा अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
स्कूलों की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अनुरूप ही स्कूलों को बजट दिया जाएगा। कई विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन हुए थे, लेकिन चोर तार काट ले गए। उन्हें पुन: दुरुस्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जहां पर बाउंड्रीवॉल नहीं है, इसके निर्माण का कार्य किया जाएगा। शौचालय दुरुस्तीकरण के लिए बीईओ के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को पत्र भेजा गया है। आगामी 15 दिनों में व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी।
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- डॉ. अमरकांत सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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