लखनऊ। विकास नगर स्थित झोपड़पट्टी में बुधवार शाम लगी भीषण आग के पीछे बिजली चोरी बड़ी वजह बनकर सामने आ रही है। यहां 25 प्रीपेड मीटर कनेक्शन के जरिये बिजली उपलब्धता का दावा है जबकि मौके पर 1200 झोपड़ियां बिजली से रोशन थीं। बिजली विभाग के जानकारों के अनुसार 25 प्रीपेड मीटर से 1200 झोपड़ियों में बिजली जल ही नहीं सकती। अंदेशा है कि खंभे से सीधे केबल खींचकर नियोजित तरीके से बिजली चोरी कराई जा रही थी।
विकासनगर के निवासी बिजली महकमे से सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता ने बताया कि 1200 झोपड़ी का सामान्य विद्युत लोड 1200 किलोवाट होना चाहिए। झोपड़पट्टी के ज्यादातर घरों में कूलर, टीवी, फ्रीज जैसे बिजली से चलने वाले उपकरण भी थे। तमाम घरों में हीटर भी इस्तेमाल होता था। साथ ही झोपड़पट्टी के किनारे ई रिक्शा भी चार्ज होते थे। 25 कनेक्शन महज 100 किलोवाट लोड सहन कर सकते थे। अधिक लोड पर स्वत: ही बिजली बंद होने का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठता है कि चार-चार किलोवाट के 25 कनेक्शन से 1200 झोपड़ियों में कैसे बिजली जल रही थी।
दौड़ाया गया था सर्विस केबल
झोपड़पट्टी में प्रीपेड कनेक्शन के सर्विस केबल को झोपड़ी-झोपड़ी तक दौड़ाया गया था। यह सर्विस केबल वैध कनेक्शन का था या अवैध, यह कहना मुश्किल है। सर्विस केबल में अनगिनत जोड़ होने के कारण विद्युत लोड बढ़ते ही स्पार्किंग होने से आग लगने का अंदेशा भी है।
टीम को बना लिया था बंधक
सूत्रों ने बताया कि झोपड़पट्टी में कई बार बिजली चोरी पकड़ी जा चुकी थी। एक बार तो उपखंड अधिकारी टीम के साथ बिजली चोरी पकड़ने गए तो उन्हें स्थानीय लोगों ने बंधक बना लिया गया था। तत्कालीन एसडीओ ने बताया कि बिजली चोरी पकड़े जाने के बाद स्थानीय नेताओं के दबाव में प्रीपेड मीटर से कनेक्शन देने पड़े थे।
दावा... 10 हजार रुपये से रिचार्ज करते थे प्रीपेड मीटर
इलाके के बिजली कर्मियों ने बताया कि एक-एक कनेक्शन का प्रतिमाह 5000 से 10 हजार रुपये का रिचार्ज होता था। कर्मियों का दावा है कि झोपड़पट्टी में बिजली के तारों की स्पार्किंग से आग नहीं लगी है। मीटर से महज 20 मीटर के दायरे में लोग बिजली का उपभोग कर रहे थे। 11 व 33 हजार वोल्ट की ओवरहेड लाइन झोपड़पट्टी के किनारे से गुजरी है।
मुफ्त में बंटे थे गैस सिलिंडर
झोपड़पट्टी में स्थानीय नेताओं की मदद से केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत 250 से ज्यादा परिवारों को मुफ्त गैस सिलिंडर में बांटा गया था। हालांकि, एलपीजी वितरक संघ के कुछ लोगों ने झोपड़पट्टी में गैस सिलिंडर दिए जाने पर बड़े हादसे का अंदेशा जताया था। इस पर ऑयल कंपनियों के अफसरों ने वितरकों को फटकारा भी था। लोगों के बीच चर्चा है कि अवैध रूप से सिलिंडर में गैस भरने के दौरान आग लग गई हो।
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अभी यह बताना मुश्किल है कि झोपड़ियों में आग शॉर्ट सर्किट से लगी है या लगाई गई है। फिलहाल मामले की तफ्तीश की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर रिपोर्ट फाइल की जाएगी।
अंकुश मित्तल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
बृहस्पतिवार को अग्निकांड स्थल से बिजली के तार व मीटर हटाते कर्मचारी। - फोटो : संवाद
बृहस्पतिवार को अग्निकांड स्थल से बिजली के तार व मीटर हटाते कर्मचारी। - फोटो : संवाद
बृहस्पतिवार को अग्निकांड स्थल से बिजली के तार व मीटर हटाते कर्मचारी। - फोटो : संवाद
बृहस्पतिवार को अग्निकांड स्थल से बिजली के तार व मीटर हटाते कर्मचारी। - फोटो : संवाद