राजधानी में पानी का मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को कम से कम 12.5 प्रतिशत वाटर टैक्स अदा करना पड़ेगा। इसको लेकर शासन स्तर पर प्रस्ताव पास हो गया है।
जल्द ही लोगों के घरों में पानी का मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। जलकल विभाग में पेयजल की दर दो रुपये प्रति किलो लीटर (प्रति 1000 लीटर) है।
हालांकि मीटर न लगने के कारण वाटर टैक्स का निर्धारण भवन के वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) के आधार पर किया जाता है। इसके लिए जलकल विभाग ने अलग-अलग श्रेणी के कई स्लैब बना रखे हैं।
जेएनएनयूआरएम योजना आने के बाद पानी के मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। जेएनएनयूआरएम में पेयजल योजनाओं के लिए धन मिलने में यह प्रमुख शर्त थी।
इसी के तहत प्रदेश सरकार पिछले तीन साल से मीटर लगाने का प्रयास कर रही है। मगर नगर निगम स्तर पर विरोध होने के कारण मीटर लगने का काम आगे नहीं बढ़ सका।
मीटर के साथ ही सरकार जेएनएनयूआरएम में नई योजनाएं आने के बाद उनके रखरखाव के लिए जल मूल्य में भी बढ़ोतरी का प्रयास कर रही है। नगर निगम सदन में पिछले साल दो बार इस आशय का प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन भारी विरोध के चलते यह पास नहीं हुआ।
जो उपभोक्ता अधिक पानी खर्च करेंगे उनको अधिक बिल देना होगा लेकिन जो कम खर्च करेंगे उनको भी एआरवी का कम से कम 12.5 प्रतिशत वाटर टैक्स देना होगा।
जलकल विभाग अधिक पानी खर्च करने वालों के टैक्स की गणना दो रुपये प्रति किलो लीटर के हिसाब से करेगा। अभी शहर में 3.19 लाख उपभोक्ता हैं।
इनसे जलकल विभाग एआरवी के आधार पर निर्धारित स्लैब के हिसाब से वाटर टैक्स वसूल करता है।
मीटर लगाने के लिए जलकल विभाग ने जल निगम को सहमति दे दी है। इसी के साथ उपभोक्ताओं की सूची भी उपलब्ध करा दी है। मीटर लगाने का काम जल निगम करेगा।
इसके लिए चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद जल निगम टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा।
शासन में पास हुए प्रस्ताव के तहत घरों में मैकेनिकल मीटर लगाए जाएंगे।