डायरिया और बुखार ने पसारे पांव, मासूम की मौत
सुल्तानपुर। जिले में दिमागी बुखार के साथ ही डायरिया ने पांव पसार लिए हैं। बुधवार दोपहर जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित एक दुधमुंहे बच्चे की मौत हो गई, जबकि दिमागी बुखार से पीड़ित बच्ची को भर्ती कराया गया है।
साथ ही डायरिया पीड़ित बच्चों से अस्पताल की न्यू इमरजेंसी विंग पटी पड़ी है। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को जिला अस्पताल का जायजा लिया तो मरीज व उनके तीमारदार भीषण गर्मी में बेहाल नजर आए।
जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक रोजाना पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में ज्यादा संख्या बच्चों की है। जिला अस्पताल में बुधवार दोपहर लंभुआ निवासी संदीप के दो माह के बेटे समर की बुखार से मौत हो गई।
फतेहपुर संगत थाना गोसाईगंज निवासी यासीन की ढाई वर्षीय सानिया भी दिमागी बुखार की चपेट में है। उसे भी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कुड़वार के मुड़वा निवासी अमरपाल का एक वर्षीय बेटा, लंभुआ के भदैंया निवासी सुशील सिंह का छह माह का बेटा वंश, कोतवाली नगर के ईदगाह निवासी समीर अहमद का दो वर्षीय बेटा अन्ना, गोसाईगंज निवासी सुरेश का दो वर्षीय बेटा ऋषभ, कोतवाली देहात के कमनगढ़ निवासी संतोष की बेटी कविता (5), सुमन (4) व अमित (3), अगई की पांच माह की बेटी महक डायरिया से पीड़ित हैं। इन सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी ने बताया कि, मौजूदा समय में ज्यादातर लोग डायरिया की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं। चिकित्सकों की पूरी व्यवस्था है। सभी सीएचसी व पीएचसी पर चिकित्सकों को अलर्ट पर रखा गया है।
जिला अस्पताल के डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि, गर्मी में बचाव ही बेहतर उपाय है। गर्मी में सिर पर गमछा या फिर टोपी पहनकर बाहर निकलें। नींबू पानी ज्यादा से ज्यादा पीयें। मोटे कपड़े पहनें, जिससे हाथ पूरी तरह से ढंके हों।
बच्चों के लिए भी इन बातों का ध्यान रखें। वायरल फीवर होने पर मरीज को तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। पेट में मरोड़ होना संक्रामकता का लक्षण है, जिसे समय रहते चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि दिमागी बुखार या मेनिनजाइटिस में मस्तिष्क की झिल्ली में सूजन आ जाती है। मांसपेशियों में दर्द, हाथ और पैर ठंडे होना, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, सिरदर्द, जी मचलाना, उल्टी आना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि, दिमागी बुखार का निदान, दिमाग के पानी की जांच, सिटी स्कैन, एमआरआई आदि के जरिए कराया जाता है। शरीर को पूरी तरह आराम दें। रोगी को अंधेरे व शांत कमरे में रखें। शरीर का तापमान कम करने के लिए बर्फ के टुकड़े कपड़े में लपेटकर शरीर की सिंकाई करनी चाहिए। डॉक्टर के परामर्श के अनुरूप टीका लगवाएं। स्थिति गंभीर होने पर पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कराएं।