मोतीपुर (बहराइच)। जंगल से सटे मिहींपुरवा कस्बे से भारत-नेपाल सीमा तक जर्जर सड़कों पर आवागमन होता है। आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए शासन ने 25 किलोमीटर मार्ग निर्माण की अनुमति दी है। 11.32 करोड़ रुपये से मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
इस मार्ग के बनने से 52 गांव की 55 हजार की आबादी की आवागमन की समस्या खत्म होगी। लोग सुगम यात्रा कर सकेंगे। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे इलाकों में सड़कों का बुरा हाल है।
मिहींपुरवा रेलवे स्टेशन से नेपालगंज सीमा पर स्थित भारतीय मटेही गांव तक ऊबड़-खाबड़ सड़क होने से लोगों के लिए यात्रा काफी कष्टकारी होती है।
हिचकोले खाते हुए ग्रामीण 25 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। इस मामले में कई बार आवाज उठाई गई। क्षेत्रीय सांसद सावित्री बाई फुले को भी ज्ञापन सौंपा गया।
सांसद के प्रस्ताव पर शासन ने मार्ग निर्माण को हरी झंडी दे दी है। 25 किलोमीटर मार्ग को डामरीकृत व आरसीसी बनाया जाएगा।
सांसद सावित्रीबाईफुले ने कहा कि धन जारी हो गया है। सड़क निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। प्रयास है कि बरसात के पहले मार्ग का निर्माण कार्य पूरा करवा लिया जाए, जिससे वर्षा के समय क्षेत्र के लोगों को आवागमन की समस्या से न जूझना पड़े।
55 हजार की आबादी को मिलेगा लाभ
मिहींपुरवा रेलवे स्टेशन से सीमावर्ती मटेही गांव तक मार्ग का निर्माण होना है। इस 25 किलोमीटर के दायरे में 52 गांव स्थित है, जिसमें करीब 55 हजार की आबादी रहती है। यह सड़क गोपिया बैराज को भी जोड़ती है। लगभग आठ किलोमीटर तक सड़क सरयू नदी के किनारे से गुजरेगी।
सड़क को कटान से बचाने के लिए बनेंगे स्पर
सांसद सावित्री बाई फुले ने बताया कि सरयू नदी के किनारे से सड़क गुजरेगी। बरसात के समय नदी की लहरें कटान करती हैं। कटान से सड़क को बचाने के लिए तीन स्थानों पर मिनी स्पर भी बनाया जाएगा, जिससे नदी के पानी का रुख सड़क की ओर से बीच धारा की ओर मुड़ जाए।