फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रिपल मर्डर मामला: नंबर प्लेट पर 'पुलिस' लिख एसयूवी से ढोए थे तीनों शव

विज्ञापन
नदी में मिला था महिला का शव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सीतापुर। ट्रिपल मर्डर मामले में वारदात को अंजाम देने वाले दरिंदों ने बेहद शातिराना दिमाग का इस्तेमाल किया। शव वाहन में आ जाएं और उन्हें ले जाते वक्त रास्ते में कहीं वाहन की रोकाटोकी न हो। इसके लिए दरिंदों ने ऐसे वाहन की तलाश की, जो बड़ी व सुरक्षित हो। इसी तलाश में उन्होंने ऐसी एसयूवी चुनी। जिसके नंबर प्लेट पर ‘पुलिस’ लिखा था।
विज्ञापन


जानकारों का भी यही मानना है कि ऐसा करने से रास्ते में कहीं भी वाहन को रोका नहीं गया। दरअसल, आवास विकास कॉलोनी निवासी नवीन गुप्ता ने अपने पांच अन्य साथियों दिलीप शर्मा, जुबेर, राहुल, मुकेश, पंकज की मदद से 12 जनवरी की रात मां व एक बेटी से दुष्कर्म करने के बाद मां व उसकी दो बेटियों की गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

बाद में दरिंदों के सामने तीनों शवों को ठिकाने लगाने की चुनौती थी। इसके लिए सभी ने प्लान बनाया कि, ऐसे वाहन की व्यवस्था की जाए, जो बड़ा हो और रास्ते में कहीं कोई उसको रोके नहीं। इसी बीच 13 जनवरी को दरिंदों ने गुजरा निवासी राजेश का वाहन तय किया।
विज्ञापन


राजेश की एसयूवी में जो नंबर प्लेट लगा था उसमें अंग्रेजी में ‘पुलिस’ लिखा था। इसलिए दरिंदे पूरी तरह से आश्वस्त थे, कि वाहन को कहीं रोका नहीं जाएगा। जिसके बाद दरिंदे शवों को जब वाहन में डालकर ठिकाने लगाने के लिए निकले, तब उन्हें किसी ने नहीं रोका।

खजुरिया के पास सरायन नदी में महिला का शव डालने के बाद दरिंदे दोनों बच्चियों के शवों को लेकर एससयूपी से हरगांव नहर के लिए निकले। तब रास्ते में शाह महोली, झरेखापुर व हरगांव कस्बे में उन्हें पुलिस तो सड़क पर मिली, लेकिन उनके वाहन को किसी ने नहीं रोका।

नतीजा वे शवों को नहर में फेंकने व वहां से सुरक्षित निकलने में भी कामयाब हो गए। जानकारों का मानना है, कि अगर वाहन पर पुलिस न लिखा होता तो शायद कहीं न कहीं पुलिस उस वाहन को रोकती, लेकिन पुलिस लिखे नंबर प्लेट के कारण उस वाहन को रोकना किसी ने जरूरी नहीं समझा।

पांच बार बिकी एसयूवी
जानकारों की माने तो जिस एसयूवी का इस्तेमाल मां व दो बेटियों के शवों को ठिकाने लगाने के लिए किया गया। वह एसयूवी पांच बार बिकी है। इस वाहन का पहला मालिक गोरखपुर का निवासी अनूप गुप्ता था, जिसके बाद यह गोरखपुर के ही अरुण कुमार सिंह के हाथ बेची गई।

उसके बाद सीतापुर के मोहम्मद अनीस और उसके बाद मुस्तकीम के हाथ बेची गई। बिकते-बिकते यह वाहन गुजरा निवासी राजेश के पास पहुंचा। पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है, कि राजेश ने यह नंबर प्लेट झांसा देने के लिए वाहन में लगाया था, या फिर पहले कोई मालिक पुलिस विभाग में तैनात था।

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही है। जिसमें अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की पड़ताल की बात कही जा रही है, जिन पर पुलिस लिखा हो।

कड़ी कार्रवाई की जाएगी
एसयूवी का मालिक राजेश है। नंबर प्लेट पर ‘पुलिस’ क्यों लिखवा रखा था। इसकी जांच की जा रही है। वाहन मालिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही जिले में अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की जांच की जाएगी, जिन पर पुलिस लिखा हो या उसका लोगो लगा हुआ हो।
-आनंद कुलकर्णी, पुलिस अधीक्षक

फॉरेंसिक जांच को भेजे गए साक्ष्य
इस घटना से जुड़े साक्ष्यों को जिले की फॉरेंसिक टीम ने जुटाया है। बताया जा रहा है कि नैपालापुर स्थित दिलीप शर्मा की जिस दुकान में महिला व दो बच्चियों की हत्या की गई। फॉरेंसिक टीम ने उस दुकान में पड़ताल कर साक्ष्य जुटाए हैं। वहीं शवों को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल की गई, एसयूवी में भी जांच की और साक्ष्य जुटाए। साक्ष्यों को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें