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पहले चार मतों से हारने वाली आशा देवी 14 मतों से रहीं विजयी

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अदालत की दखल पर हुई पुनर्मतगणना में धांधली उजागर
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महोली (सीतापुर)। अदालत के दखल पर पुनर्मतगणना में आखिर सच की जीत हुई। चार मतों से हार का मुंह देखने वाली रनर उम्मीदवार को इंसाफ मिला। कड़ी निगरानी में पारदर्शी मतगणना हुई तो चार मतों से हार चुकी आशा देवी 14 मतों से विजयी रहीं।

इंसाफ के संग वर्चस्व के मुकाबले में जीत हासिल कर आशा देवी के खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं निवर्तमान प्रधान रामकिशोरी का खेमे में मायूसी छा गई। एसडीएम ने जीत-हार पर अंतिम निर्णय 25 जनवरी को न्यायालय द्वारा लिए जाने की बात कही गई है।
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विकासखंड महोली की ग्राम पंचायत चव्वा बेगमपुर में पंचायत चुनाव के दौरान रामकिशोरी पत्नी श्रीकृष्ण चार मतों से विजयी घोषित की गई थी। रामकिशोरी को 775 मत और आशा देवी पत्नी शिशुपाल को 771 मत पाना दर्शाया गया था। रनर रहने वाली आशा देवी ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत के आदेश पर बुधवार को तहसील सभागार में एसडीएम ब्रजपाल सिंह की देखरेख में आरओ गन्ना विकास निरीक्षक नारायण मिश्रा, खंड विकास अधिकारी एके चौबे, तहसीलदार पीसी मौर्य सहयोगी एसडीओ अनुज मिश्रा एडीओ एजी दिनेश वर्मा सचिव गन्ना समिति केएन पांडेय द्वारा तीसरी आंख की निगरानी में पुनर्मतगणना कराई गई।

इसमें रामकिशोरी को 753 मत जबकि आशादेवी को 767 मत मिले। इस तरह पहले चार मतों से हारने वाली आशादेवी पुनर्मतगणना में 14 मतों से जीत गईं। एसडीएम ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पुनमर्तगणना कराई गई है।

इसकी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। अंतिम निर्णय न्यायालय का ही मान्य होगा। न्यायालय 25 जनवरी को फैसला देगा। हारकर विजयी होने वाली आशादेवी ने इसे सच की जीत बताई है।

कोर्ट ने लिया संज्ञान तो पूर्व के मतगणना कर्मियों व आरओ पर हो सकती है कार्रवाई
पहले चार मतों से जीतने वाली प्रत्याशी का पुनर्मतगणना में 14 मतों से हारना पहले की मतगणना को कटघरे में खड़ा कर रहा है। पुनर्मतगणना के नतीजों ने मतगणना की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
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जाहिर है, पूर्व के मतगणना कर्मियों और आरओ की मिलीभगत से धांधली हुई है। एसडीएम ब्रजपाल सिंह ने बताया कि पुनर्मतगणना में रामकिशोरी के 18 मत अवैध मिले जबकि आशा देवी के चार मत अवैध मिले हैं।
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