टांडा (अंबेडकरनगर)। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 लुंबिनी वाराणसी मार्ग निर्माण में किसानों ने मंगलवार को प्रशासन पर बगैर अधिग्रहीत भूमि पर लगी फसलों को भी रौंद देने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। हालांकि प्रशासन की सख्ती के चलते किसान ज्यादा मुखर होकर सामने नहीं आ पाए। वहीं, प्रशासन के मुताबिक काम नियमानुसार ही कराया गया है।
एनएच 233 के निर्माण में प्रशासन के रवैये को लेकर किसानों में आक्रोश है। एक तरफ जहां किसानों का आरोप है कि उन्हें समुचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है, वहीं मनमाने तरीके से निर्माण करने का आरोप भी किसान एनएचआई अधिकारियों पर लगा रहे हैं। इसके चलते पुंथर समेत कई गांवों के किसान समुचित न्याय के लिए धरने पर भी डटे हैं। किसानों के बढ़ते विरोध के बीच सोमवार को प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि किसानों का किसी भी दशा में अहित नहीं होने पाएगा। इसके बाद किसान धरना स्थल से हट गए। किसानों के मुताबिक इसी का फायदा उठाकर एनएचआई अधिकारियों ने मंगलवार सुबह ही रामपुर कला गांव की सीमा से पुंथर गांव की सीमा तक ग्रेडर व जेसीबी से बगैर अधिग्रहीत भूमि पर लगी फसलों को रौंदना शुरु कर दिया। कार्य में तेजी इतनी कि देखते ही देखते पुंथर गांव के कृष्णमोहन, मदनमोहन, अदन मोहन, अरुण मौर्य, रामकुशल, चरित्र, रामनेवल सहित 15 से अधिक किसानों की सरसों व गेहूं आदि की फसलों को नष्ट कर दिया गया।
एनएचआई अधिकारियों की इस मनमानी की खबर थोड़ी ही देर में कई गांवों तक पहुंच गई। किसान नेता रणजीत वर्मा भी मौके पर पहुंचे। किसानों का कहना था कि प्रशासन से तय हुआ था कि 60 दिन के अंदर सभी मामलों का निस्तारण होगा। समस्याओं का निपटारा हुआ नहीं और समझौते के अगले ही दिन से किसानों की फसलों को नष्ट करने का काम शुुरू करना अन्यायपूर्ण है। किसानों के आक्रोश की सूचना पर एसडीएम नरेंद्र सिंह व सीओ वीके श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर के लिए काम रुका। इसके बाद किसान शांत हुए। एसडीएम नरेंद्र सिंह के मुताबिक अधिग्रहीत भूमि पर ही काम हुआ है। काम रोका नहीं गया है, काम चल रहा है।