रात में बाड़े में सूकर चुराने पहुंचे थे बदमाश
पयागपुर (बहराइच)। पयागपुर थाना अंतर्गत झिंगुरी पासीपुरवा गांव में सोमवार रात बदमाश सूकर चुराने पहुंचे। पिता-पुत्र ने विरोध किया तो बदमाशों ने उनकी पिटाई कर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान गोली लगने से पुत्र की मौत हो गई। जबकि पिता जख्मी हो गया।
मृतक के भाई की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है। मामले में पांच संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
झिंगुरी पासीपुरवा गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद का अहाता व सूकरबाड़ा गांव के बाहर है। रोज की तरह राजेंद्र अपने 17 वर्षीय पुत्र बंटी के साथ अहाते व सूकरबाड़े की सुरक्षा के लिए सोने गए थे। रात में करीब 11 बजे पिता-पुत्र एक ही चारपाई पर सो रहे थे।
तभी कट्टे व बंदूक से लैस बदमाश मौके पर आ धमके। सभी मवेशियों को ले जाने की फिराक में थे। आहट पाकर राजेंद्र ने शोर मचाया। इस पर बदमाशों ने राजेंद्र को काबू में कर उसकी पिटाई शुरू कर दी। पिता की जान बचाने के लिए पुत्र बंटी दौड़ा और बदमाशों से उलझ गया।
बचाव के लिए शोर भी मचाने लगा। इस पर गांव के लोग दौड़े। बदमाशों ने अपने को घिरता देख फायरिंग शुरू कर दी। इसमें एक गोली बंटी के सीने को पार करती हुई निकल गई। वह जमीन पर गिरकर तड़पने लगा। इस पर बदमाश भाग गए।
तब तक ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। लहूलुहान हालत में बंटी को रात में ही जिला अस्पताल भेजा गया। वहां पर पहुंचते ही उसने दम तोड़ दिया। वहीं बदमाशों के हमले में घायल पिता राजेंद्र का प्राथमिक उपचार किया गया है।
थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने बताया कि बदमाश मवेशियों को चुराने की नियति से आए थे। लेकिन मामला बिगड़ता देख सभी ने फायरिंग की। जिसमें बंटी की जान गई। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इस मामले में मृतक के भाई रंगीले की तहरीर पर चोरी के प्रयास और हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हमले में घायल राजेंद्र के बयान के आधार पर क्षेत्र से पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।
माता-पिता का लाडला था बंटी
पयागपुर। झिंगुरी पासीपुरवा गांव में बदमाशों की गोली से पिता के सामने दम तोड़ने वाला बंटी माता-पिता का लाडला था। वह दो भाई थे। अब घर में बड़ा भाई रंगीले ही बचा है। बंटी की मौत के बाद परिवार के लोग पछाड़े खा-खाकर गिर रहे थे। पिता राजेंद्र व बंटी की मां गुड़िया का रो-रोकर हाल बेहाल था। उसके बड़े भाई रंगीले की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे।