बहराइच/महसी। तराई व नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार सुबह घाघरा नदी महसी क्षेत्र में उफान पर आ गई।
टापू पर बसे सात गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। यहां छह हजार लोग फंसे हैं। कायमपुर-सांवलपुरवा संपर्क मार्ग पर भी आवागमन ठप हो गया है।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर दूर है। देर शाम तक नदी लाल निशान पार कर सकती है। तटवर्ती इलाकों में अफरातफरी की स्थिति है।
लोगों ने आशियाना उजाड़ना शुरू कर दिया है। कटान के कारण भोर से दोपहर तक चार मकान घाघरा में समाहित हो चुके हैं।
घाघरा नदी एकबार फिर महसी, कैसरगंज और नानपारा क्षेत्र में कहर बरपाने लगी है। केंद्रीय जलायोग संस्थान घाघराघाट की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 105.901 मीटर मापा गया।
यह खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर दूर है। जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में देर शाम तक नदी खतरे का निशान पार कर सकती है।
जलस्तर में इजाफा होने से नदी के उस पार बसे ग्राम पंचायत गोलागंज के मजरा बरुआ बेहड़, अहिरनपुरवा, लोनियनपुरवा, सिंघापुरवा, मंहगूपुरवा, राजापुरवा और नयापुरवा इसकी चपेट में आ गए हैं।
इन ग्रामीणों के निकलने का रास्ता नहीं बचा है। लगभग छह हजार की आबादी फंसी है। नाव की भी व्यवस्था नहीं हो सकी है। प्रशासनिक दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
उधर, कायमपुर के पास नदी के उफनाने से कायमपुर-सांवलपुरवा संपर्क मार्ग पर पानी चल रहा है। इससे तटबंध की ओर आने का रास्ता बंद हो गया है। ग्रामीण परेशान हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी तेजी से कटान कर रही है।
नदी में समाये चार मकान
प्रधानपुरवा गांव में 30 मकान थे। लेकिन पिछले वर्ष 25 मकान कट गए। सिर्फ पांच मकान बचे हैं। उनमें भी गांव निवासी रामतेज के घर को बुधवार भोर में नदी की लहरों ने लील लिया।
गोलागंज में तीन ग्रामीणों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। सूचना पाकर राजस्व निरीक्षक रामचंदर गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया है।