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आज से खुलेंगे स्कूल, न शिक्षक पर्याप्त न ही किताबें

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फैजाबाद। ग्रीष्मावकाश के बाद सोमवार से जिले के परिषदीय स्कूल खुल जाएंगे। वैसे कॉन्वेंट की होड़ में सत्र तो अप्रैल से ही शुरू गया है, मगर तैयारियां आधी-अधूरी ही हैं। स्कूल बंदी के डेढ़ माह के समय में भी शिक्षा महकमा न तो किताबों का इंतजाम कर सका और न ही शिक्षकों की कमी ही पूरी हो पाई है। जिले के करीब साढ़े तीन सौ जूनियर हाईस्कूल के बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर ही बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश होंगे। एक बार फिर कॉन्वेंट स्कूलों से तुलना करके उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने में विभाग नाकामयाब दिख रहा है।
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परिषदीय स्कूलों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। लचर सफाई व्यवस्था, बदहाल शौचालय, शिक्षकों की लेटलतीफी, मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी, कॉपी-किताब, जूता-मोजा आदि वितरण में धांधली सहित तमाम अनियमितताओं की वजह से इन स्कूलों से बच्चों का मोह भंग होता जा रहा है। इसी का नतीजा है कि गत वर्षों में यहां छात्र संख्या बढ़ने के बजाय तेजी से घट रही है। सीबीएसई के पैटर्न पर अब परिषदीय स्कूलों में शिक्षण सत्र का शुभारंभ बीते अप्रैल से हो गया है। डेढ़ माह तक नौनिहालों ने बिना कॉपी-किताब, बैग, जूता-मोजा, ड्रेस आदि के शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद ग्रीष्मावकाश हो गया। अब सोमवार से फिर स्कूल खुल जाएंगे, लेकिन इस अंतराल में तमाम खामियों को दूर करने में विभाग नाकाम रहा है। इससे बेहतर शिक्षा की कल्पना इन स्कूलों में समझ से परे है।

शिक्षकों के 1100 पद रिक्त
जिले में 1529 प्राथमिक व 568 जूनियर हाईस्कूल हैं। यहां बीते सितंबर तक एक लाख 89 हजार छात्र पंजीकृत थे। इनको पढ़ाने के लिए एक जूनियर हाईस्कूल में अमूमन तीन व प्राथमिक विद्यालय में दो अध्यापकों की आवश्यकता होती है। लेकिन जिले भर में करीब 1100 पद शिक्षकों के रिक्त हैं। जिले के 1992 शिक्षामित्रों का समायोजन रद होने के बाद स्थिति और बदतर हो गई है। सबसे खराब स्थिति नगर क्षेत्र के स्कूलों में है। यहां 43 प्राथमिक व 13 जूनियर हाईस्कूल हैं। जिसके सापेक्ष कुल 29 शिक्षकों की तैनाती है। यहां कुल 32 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। मौजूदा समय में एक-एक शिक्षकों के पास चार-पांच स्कूलों का चार्ज है। 28 स्कूल सिर्फ एकल शिक्षामित्रों के सहारे ही संचालित है। शिक्षामित्रों के अवकाश होने पर यहां तालाबंदी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस तरह संसाधनों व शिक्षकों के अभाव में नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है और लोग अपने बच्चों को यहां भेजने से कतराते हैं।
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नौ स्कूलों में शौचालय नहीं
नगर क्षेत्र के नौ ऐसे स्कूल हैं, जहां शौचालय नहीं है। इसका कारण है कि ये स्कूल आजादी के बाद से अब तक किराये के भवन में चल रहे हैं। भवन व शौचालय के अभाव में यहां बच्चों के साथ-साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी असुविधाएं होती हैं। नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मोदहा में न तो शौचालय है और न ही हैंडपंप। बच्चों को पीने के लिए पानी भी घर से लाना पड़ता है। वहीं शौचालय की आवश्यकता होने पर बच्चों को घर भेज दिया जाता है। इस बार भी विभाग इन समस्याओं से उबर नहीं पाया है।

350 जूनियर हाईस्कूलों में नहीं पहुंचा फर्नीचर
जिले के करीब 350 स्कूलों के कुल 7800 बच्चों को इस बार फर्नीचर पर बैठने की योजना बनाई गई है। जिसके लिए एक करोड़ 71 लाख की धनराशि भी आवंटित की गई है। काफी विलंब से टेंडर होने के कारण अभी तक फर्नीचर मुहैया नहीं हो सका। इस तरह सोमवार से स्कूल खुलने पर नौनिहालों को फिर टाटपट्टी पर ही बैठकर पढ़ाई करनी पड़ेगी। इससे बड़े बच्चों को असुविधा होती है। डीसी निर्माण गिरिजाशंकर पांडेय ने बताया कि धनराशि आवंटित हो गई है। टेंडर में विलंब होने से अभी फर्नीचर नहीं आ सका, लेकिन आमद शुरू हो गई है।

सिर्फ 25 प्रतिशत मिलीं किताबें
जिले के हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले बच्चों के लिए सिर्फ 25 प्रतिशत किताबें ही मिल सकी हैं। जबकि 60 मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले अंग्रेजी माध्यम के नौ हजार बच्चों को आज भी बिना किताब के ही पढ़ाई करनी होगी। जिले में हिंदी माध्यम के बच्चों के लिए 11 लाख 62 हजार 425 किताबों की जरूरत है, जिसके सापेक्ष महज दो लाख 91 हजार 537 किताबें ही प्राप्त हुई हैं। इस तरह एक-एक कक्षा में मामूली किताबें ही बंट सकती हैं।

सोमवार से स्कूल खुलेंगे। कुछ किताबें प्राप्त हो गई हैं। और किताबों के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। फर्नीचर का टेंडर हो गया है। शीघ्र ही स्कूलों में पहुंच जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट नहीं आने पाएगी, इसके लिए हर बिंदुओं पर ध्यान रखा जा रहा है। कई जगह औचक निरीक्षण भी किया जाएगा।
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- अमिता सिंह, बीएसए फैजाबाद
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