लेटलतीफी रोकने कलेक्ट्रेट में लगेगी बायोमीट्रिक मशीन
सीतापुर। पटरी से उतरी सरकारी मुलाजिमों की गाड़ी को ढर्रे पर लाने को कलेक्ट्रेट में एक बार फिर से बायोमैट्रिक मशीन से हाजिरी जांची जाएगी। सरकारी दफ्तर में अफसर-कार्मिकों की लेट-लतीफी पर अकुंश लगाने के लिए कलेक्ट्रेट में बायोमीट्रिक अटेंडेस मशीन लगेगी।
रोजाना सुबह दफ्तर आने पर व शाम को ऑफिस छोड़ने पर प्रत्येक कार्मिक अपने अंगूठे की छाप देंगे। इस मशीन से अब सभी की हाजिरी आसानी से चेक की जा सकेगी। ज्ञात हो कि सरकार ने सभी कर्मचारियों को जिला, तहसील व ब्लॉक मुख्यालयों पर रूकने का आदेश दे रखा है।
बावजूद इसके अफसर व कर्मचारी इसकी परवाह नहीं करते। अन्य जिले से रोजाना आना-जाना करते हैं। यही कारण है कि सरकारी दफ्तरों में उनकी लेटलतीफी लगातार जारी है। वरिष्ठ अफसरों के निरीक्षण में इनकी यह गलती पकड़ी जाती है पर चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद भी इनकी लेटलतीफी बदस्तूर जारी है।
हालांकि इस लेटलतीफी को रोकने के लिए साल 2005 में तत्कालीन डीएम आमोद कुमार ने कलेक्ट्रेट कर्मचारियों के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस मशीन लगवाई थी। इस मशीन में सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के अंगूठे से हाजिरी लगाई जाने लगी थी।
इससे लगभग सभी अफसर व कर्मचारी राइट टाइम हो गए थे। परंतु डीएम के तबादले के बाद ही कलेक्ट्रेट कार्मिकों ने बायोमैट्रिक अटेंडेंस मशीन को किनारे लगा दिया और बरसों पुरानी व्यवस्था की राह पकड़ ली।
तब से पुरानी रजिस्टर परंपरा पर सरकारी मुुलाजिमों की गाड़ी दौड़ रही है। न तो उनके आने का कोई समय है और न ही जाने का। सभी मनमर्जी के मालिक बन गए हैं।
इसे देखते हुए नवागत डीएम शीतल वर्मा ने कलेक्ट्रेट में एक बार फिर से बायोमीट्रिक मशीन लगाने का निर्णय लिया है। योजना के मुताबिक रोजाना सुबह दफ्तर आने व जाने वाले अफसर-कार्मिकों को बायोमीट्रिक अटेंडेस मशीन पर अपने अंगूठे की छाप देनी होगी।
कलेक्ट्रेट के अलावा सभी तहसीलों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस मशीनें लगेगी। ये मशीनें यहां की सात तहसील सीतापुर सदर, महोली, लहरपुर, बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली, मिश्रिख में लगाई जाएंगी। इन मशीनों की खरीद प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जल्द ही मशीनें तहसीलों में लग जाएंगी।
जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि सरकारी कार्यालयों में अफसर-कार्मिकों की लेटलतीफी पर अंकुश लगाने के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेस मशीन लगाने की योजना बनाई गई। यह मशीन लगने के बाद सभी को इस पर अपने अंगूठे की छाप देनी होगी। इससे मशीन में उनके आने और जाने का समय रजिस्टर्ड हो जाएगा।