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शिक्षा माफिया ने साठगांठ कर भराए फॉर्म, नहीं मिले प्रवेश पत्र

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फैजाबाद। इस बार सरकार ने सुचितापूर्ण व नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए जब नकेल कसी और तमाम नई व्यवस्थाएं लागू कीं तो पिछले लंबे समय से फल-फूल रहे तमाम गोरखधंधों का एक-एक करके खुलासा हो रहा है। सिस्टम की इन्हीं नाकामियों की वजह से जिले में सैकड़ों निजी परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित हो जाएंगे।
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अब तक छात्रों के व्यक्तिगत फॉर्म भराने को लेकर स्कूलों में गोरखधंधा पनप रहा था। यद्यपि व्यक्तिगत फॉर्म भराने के लिए डीआईओएस की ओर से कुछ राजकीय विद्यालय ही अधिकृत किए जाते हैं, लेकिन तमाम वित्त विहीन विद्यालयों का भी इसमें पर्याप्त दखल रहता है। ये निजी व गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय छात्रों को अंधकार में रखकर मोटी रकम वसूलते हैं और किसी तरह उनका दाखिला करा देते हैं। जबकि व्यक्तिगत प्रवेश का शुल्क करीब ढाई से तीन सौ रुपये के मध्य है। यह धंधा प्रत्येक वर्षों की भांति इस वर्ष भी किया गया। सूत्र बताते हैं कि लोग बच्चों को गुमराह करके सीधे दसवीं व बारहवीं में उनका दाखिला करा देते हैं। जबकि इंटर या हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए ग्यारहवीं या नौवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है या दो वर्ष का पत्राचार किया गया हो। हर बार मैनुअल व्यवस्थाओं की वजह से पंजीकरण संख्या आदि ट्रैस न होने से लोग अपने गोरखधंधे में कामयाब रहते थे। इस बार ऑनलाइन व्यवस्था किए जाने से शिक्षा माफिया के मंसूबों पर पानी फिर गया। जिसका खामियाजा तमाम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। सिस्टम की इस नाकामी की वजह से प्रदेश के करीब चार हजार व्यक्तिगत छात्रों को परीक्षा से वंचित होना पड़ेगा। जिले में भी ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं। छात्रों ने विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से ढाई से तीन हजार रुपये खर्च करके व्यक्तिगत दाखिले ले लिए, इनका प्रैक्टिकल भी हो गया। यहां तक कि इनका अनुक्रमांक भी जारी कर दिया गया, लेकिन इस फर्जीवाडे़ पर माध्यमिक शिक्षा परिषद की नजर पड़ते ही इन्हें बोर्ड परीक्षा से वंचित कर दिया गया। छात्रों को मामले की जानकारी प्रवेश पत्र न मिलने पर हुई।
शनिवार को भी शहर के पुष्पराज के निकट रहने वाला एक छात्र शिक्षा माफिया के इसी मकड़जाल में फंसकर दर-दर भटकता रहा। छात्र ने बताया कि उसने शिक्षा क्षेत्र मसौधा में स्थित में एक इंटर कॉलेज के माध्यम से जीजीआईसी हैदरगंज से बारहवीं में व्यक्तिगत छात्र के रूप में दाखिला लिया था। जिसके लिए उससे अब तक करीब 2500 रुपये विभिन्न मदों में जमा कराए गए। उसे 4091091 अनुक्रमांक भी जारी किया गया, लेकिन प्रवेश पत्र नहीं मिला। संबंधित से पूछताछ करने पर बताया गया कि वह ग्यारहवीं पास नहीं है, इसलिए उसे बोर्ड की ओर से वंचित कर दिया गया है। जिले में इस बार दसवीं के 994 व बारहवीं के 1499 व्यक्तिगत छात्र परीक्षार्थी हैं। इस तरह अभी जिले में कई विद्यार्थी इसी व्यवस्था के शिकार हो सकते हैं।
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माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि इसमें छात्रों का कोई दोष नहीं है। इस बार सरकार की सख्ती पर शुरू हुई ऑनलाइन व्यवस्था में यह पकड़ में आ गया और प्रदेश के करीब चार हजार बच्चे परीक्षा से वंचित हो गए। इसमें से सैकड़ों बच्चे जिले में भी प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, इस संबंध में जीआईसी हैदरगंज के प्रधानाचार्य मातवर प्रसाद वर्मा का कहना है कि किन्हीं कारणों से छात्र का प्रवेश पत्र नहीं आया है। जांच की जा रही है। ऐसे कितने बच्चे प्रभावित हुए हैं, इसकी उन्हें भी जानकारी नहीं है।

कोट्स..
ऑनलाइन प्रक्रिया में किन्हीं कारणों से बच्चों को परीक्षा से वंचित किया गया है। बोर्ड की ओर से कितने छात्र जिले में परीक्षा से वंचित किए गए हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं प्राप्त हुई है। एक छात्र का मामला सामने आया है, जांच कराई जा रही है।
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-डॉ. राजेश कुमार आर्य, डीआईओएस फैजाबाद
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