कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि
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बैठक में यह तय हुआ कि राम मंदिर की नींव का निर्माण इंजीनियरिंग फिलिंग पद्धति से किया जाएगा। इसके लिए जितनी भूमि में मंदिर निर्माण होना है, उस पूरी भूमि को 12 मीटर तक खोदा जाएगा। उसके बाद उसमें फिलिंग के लिए कौन से मैटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा, यह रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद उस खोदे गए गड्ढे में जमीन की सतह से ऊपर तक फीलिंग की जाएगी, इस पद्धति को ही इंजीनियरिंग फिलिंग कहते हैं। फिलहाल मंदिर की नींव खोदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।