गोंडा। योगी सरकार बनने के बाद से पशु वधशालाओं पर पूरी तरह से लगाम लग गई है। इससे छुट्टा जानवरों की बाढ़ सी आ गई है। इससे किसानों की फसल की क्षति हो रही है। छुट्टा, बेसहारा व निराश्रित गोवंशों के वृहद संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले में 120 लाख रुपये से वृहद गो संरक्षण केंद्र की स्थापना कराने का निर्णय लिया है। गोंडा सहित प्रदेश के 68 जिलों में ये केंद्र बनाए जाएंगे। इसके लिए हर जिले में राज्य आकस्मिकता निधि से 50 लाख रुपये की पहली किस्त के आवंटन के लिए पत्र जारी किया गया है। गो संरक्षण केंद्र में पशुओं के रहने, खाने सहित देखभाल करने वाले कर्मियों के लिए अलग से आवास बनाए जाएंगे। इससे किसानों को छुट्टा जानवरों से निजात मिलेगी और पशुओं का संरक्षण भी हो जाएगा। 14 हजार वर्ग फिट में गो संरक्षण केंद्र निर्माण के लिए जिलाधिकारी को निर्विवादित भूमि तलाशने तथा लोक निर्माण विभाग से इस्टीमेट तैयार कर कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया गया है। उधर, जिले में वृहद गो संरक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए निर्धारित की गई धनराशि कम पड़ने पर मनरेगा, ग्राम पंचायत की संचित निधि, वित्त आयोग, खनिज विकास, जिला पंचायत निधि, क्षेत्र पंचायत निधि, सांसद, विधायक निधि आदि से धनराशि ली जा सकेगी। इसके लिए जिलाधिकारी को अधिकृत किया गया है।
गो संरक्षण केंद्र में होगी ये व्यवस्था
-अलग-अलग चार गोवंश शेड जिसका कुल क्षेत्रफल 14000 वर्ग फिट होगा।
- दो भूसा गोदाम जिसका कुल क्षेत्रफल 1100 वर्ग फिट होगा।
-चारा पानी के लिए चार चरहियां 800 वर्ग फिट में।
-कार्यालय /औषधि कक्ष 300 वर्ग फिट में।
-छह कर्मचारियों के लिए आवास शौचालय, स्नानागार 1100 फिट में।
-शेडों के बाहर भी खुले क्षेत्र में चरनियां 5400 वर्ग फिट में जिस पर बाद में शेड का निर्माण कराया जा सके।
-एक पंप हाउस का निर्माण होगा। एक सबमर्सिबल पंप/सोलरपंप तथा 10 हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकी स्थापित की जाएगी।
-गो संरक्षण केंद्र के चारों तरफ बाउंड्रीवाल तथा बाड़ लगाए जाएंगे।
मांगा गया इस्टीमेट
गो संरक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए जिलाधिकारी को भूमि उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। साथ ही भूमि उपलब्ध कराने के साथ ही लोक निर्माण विभाग से केंद्र स्थापना के लिए पूरा आगणन मांगा गया है। जिससे खर्च का पूरा अनुमान लगाया जा सके और इसी वित्तीय वर्ष में कार्य पूरा हो सके।
तलाश की जा रही जमीन
गो संरक्षण केंद्र के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। चकसेनिया गांव में गो पालन का कार्य हो रहा था, लेकिन उस भूमि की सही स्थिति लेखपाल भी नहीं बता पा रहे हैं। जिले में एक पहले से करुणा गौशाला का संचालन हो रहा है। जमीन की तलाश के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।
-डॉ. आरपी यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी गोंडा