अंबेडकरनगर। हिंदी की अलख जगाने में जिले की कई हस्तियां अपना बड़ा योगदान दे रही हैं। विविध आयोजनों के माध्यम से हिंदी का प्रचार-प्रसार करने में अपनी प्रमुख भूमिका का निर्वाह करने के साथ ही ऐसे लोगों द्वारा जिले का नाम भी रोशन किया जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक कार्यकर्ता सै. सलाहुद्दीन अशरफ और कवि अभय सिंह निर्भीक का नाम शामिल है।
10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस है। जाहिर तौर पर यह वह दिन है, जब पूरे विश्व में हिंदी की सार्थकता को बढ़ते क्रम में देखा जाता है। जिले में भी ऐसे कई लोग हैं, जो हिंदी भाषा व हिंदी साहित्य के विस्तार के लिए लगातार प्रमुखता से काम कर रहे हैं। इनमें प्रमुख नाम है किछौछा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सै. सलाहुद्दीन अशरफ का। वे व्यापार के सिलसिले में दुबई में रहते हैं। उनके भाई सै. मेराजुद्दीन किछौछवी विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह शरीफ की इंतेजामिया कमेटी के चेयरमैन हैं। सै. सलाहुद्दीन ने दुबई में 15 वर्ष पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन शुरू किया। इसमें भाग लेने के लिए भारत से कई वरिष्ठ राजनेता व नौकरशाह जाते रहे हैं। मेराजुद्दीन बताते हैं कि कवि सम्मेलन की विशेषता यह है कि उसकी शुरुआत में राष्ट्रगान होता है। विदेश में होने वाला यह ऐसा प्रमुख आयोजन है, जिसमें हिंदी साहित्य की प्रमुखता रहती है। इस वर्ष 16वीं बार 26 जनवरी को यह आयोजन दुबई में होगा।
उधर, अकबरपुर के कहरा सुलेमपुर निवासी युवा कवि अभय सिंह निर्भीक ने भी हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार का बीड़ा उठा रखा है। कई प्रमुख साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके अभय सिंह ने चेन्नई, मुंबई, झारखंड, बिहार व छत्तीसगढ़ आदि प्रांतों में जाकर हिंदी साहित्य को मजबूती से लोगों के सामने रखा है। बीते वर्ष लाल किले पर हुए कवि सम्मेलन में प्रमुखता से आमंत्रित हुए अभय सिंह कई साहित्यिक पत्रिका के माध्यम से हिंदी साहित्य का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। अभय सिंह कहते हैं कि युवाओं में हिंदी साहित्य को लेकर और रुचि बढ़ाने की जरूरत है।