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15 मीटर स्पर बहा, खतरे में गांव

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बहराइच/राजीचौराहा। बाढ़ खत्म होने के बाद अब घाघरा की लहरें कटान से कहर बरपा रही हैं। हालात यह हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों मीटर कटान हो रही है। कटान के चलते बुधवार को चुरईपुरवा गांव के निकट स्थित स्पर नंबर चार का 15 मीटर हिस्सा नदी में समाहित हो गया। इससे अब घाघरा की लहरें सीधे चुरईपुरवा गांव की ओर बढ़ रही हैं। जिससे गांव पर संकट मंडराने लगा है। गांव के जो ग्रामीण कटान थमने का इंतजार कर रहे थे, वह गृहस्थी समेटकर बुधवार दोपहर से पलायन करने लगे हैं।
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घाघरा की लहरों से ग्रामीणों को बचाने के लिए इस बार बड़े पैमाने पर हीलाहवाली बरती गई है। जिसका नतीजा धीरे-धीरे सामने आ रही है। बाढ़ के समय तटबंध पर रिसाव की स्थिति बनी, अब नदी की लहरें कटान करते हुए कहर बरपा रही हैं। बुधवार को घाघरा की लहरों ने चुरई-मंगलपुरवा मार्ग के निकट तीन साल पूर्व स्थापित स्पर नंबर चार के 15 मीटर हिस्से को कटान करते हुए लील लिया। जिससे नदी की धारा अब सीधे चुरईपुरवा गांव की ओर मुड़ गई है। गांव को कटान से बचाने के लिए दो साल पूर्व कटान निरोधक योजना के तहत 200 से अधिक परक्यूपाइन लगाए गए थे। यह परक्यूपाइन भी नदी की तेज धारा में बह गए। इससे गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई है। जो ग्रामीण थमने का इंतजार कर रहे थे, वह गृहस्थी समेटकर पलायन करने लगे हैं।
इन ग्रामीणों के मकान हुए समाहित
स्पर का बड़ा हिस्सा कटने और नदी की धारा मुड़ने के चलते लहरें सीधे ग्रामीणों के मकान पर ठोकर मार रही हैं। इस कारण गांव निवासी लल्ला, भगौती, पोतवा, रामचंदर के मकानों को बुधवार सुबह 10 बजे के आसपास नदी की लहरों ने लील लिया। इसके बाद ग्रामीणों के पलायन कर सिलसिला तेज हो गया।
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तो तीन दिन में खत्म हो सकता है गांव का अस्तित्व
चुरईपुरवा गांव में 175 मकान थे। वर्ष 2016 में नदी की लहरों ने कटान करते हुए 80 मकानों को लील लिया था। ग्रामीणों को विश्वास था कि गांव के शेष हिस्से को कटान से बचाया जाएगा। लेकिन कटान निरोधक कोई उपाय नहीं हुए। इसके चलते इस बार भी बड़े पैमाने पर मकान नदी में समाहित हुए हैं। इस समय गांव में सिर्फ 42 मकान बचे हैं, लेकिन स्पर कटने के बाद से गांव पर खतरा बढ़ गया है। जिससे ग्रामीण आशियाने उजाड़कर पूरी तरह पलायन कर रहे हैं।
बहे हैं परक्यूपाइन, तटबंध से नहीं है लेनादेना
तटबंध और चुरईपुरवा गांव की सुरक्षा के लिए स्पर का निर्माण हुआ था। स्पर और गांव को सुरक्षित रखने के लिए दो साल पूर्व परक्यूपाइन लगवाए गए थे। जिससे कि नदी की धारा को मोड़ा जा सके। वहीं परक्यूपाइन बहे हैं। कटान में स्पर को आंशिक नुकसान हुआ है। तटबंध और गांव की सुरक्षा से लेनादेना नहीं है। फिलहाल बहे हुए स्पर को दुरुस्त करवाने के लिए बालू की बोरियां डलवाई जा रही हैं। मौके पर कैंप कर रहा हूं।
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-शोभित कुशवाहा, एक्सईएन सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम
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