निगम में सीट क्षमता के हिसाब से बसों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इसी के हिसाब से प्रति किमी. की तय दर से अनुबंधित बसों के लिए भुगतान किया जाता है। किसी मालिक ने 36-39 सीट क्षमता की बस का अनुबंध किया तो उसेे डीजल औसत का निर्धारण 28-35 सीट वाली बस की श्रेणी में करके पेमेंट होना चाहिए था। लेकिन साठगांठ कर 40-45 सीट वाली बसों के लिए भुगतान कर दिया गया।
बस का भुगतान रेट
सीट रेट प्रति किमी.
22-27 8.57 रुपये
28-35 10.07 रुपये
40-45 11.80 रुपये
54-बड़ी 15.16 रुपये
घोटाले की भनक मुख्यालय पहुंची तो जांच के बाद रिपोर्ट प्रबंध निदेशक पी. गुरु प्रसाद के सामने रखी गई। प्रबंध निदेशक ने सीधे मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) एचएस गाबा को बस मालिकों से ज्यादा ली गई रकम की वसूली का निर्देश दिया। मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को बस मालिक से रिकवरी आदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन के महासचिव अजीत कुमार सिंह ने अपर प्रबंध निदेशक को पत्र देकर बस मालिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- पहले सभी मामलों की जांच की जाए। जिस बस मालिक पर अवैध भुगतान की बात पता चले उससे उतनी ही वसूली की जाए।