फर्जी दस्तावेज पर होम लोन देकर बैंक को लाखों रुपये का चूना लगाने वाले इलाहाबाद स्थित एसबीआई की छिबैया शाखा प्रबंधक रहे परमहंस दुबे को सीबीआई की विशेष अदालत ने 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
धोखाधड़ी में बैंक प्रबंधक के साथ शामिल गोविंद राम तिवारी, गोपीकृष्ण पांडेय तथा ब्रह्म प्रकाश तिवारी को भी 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई है।
विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) लल्लू सिंह ने परमहंस दुबे, गोपीकृष्ण पांडेय व ब्रह्म प्रकाश तिवारी पर 2.85-2.85 लाख रुपये और गोविंद राम तिवारी पर 2 लाख 95 हजार का जुर्माना ठोका है।
सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि परमहंस दुबे 2003-2004 के दौरान इलाहाबाद स्थित एसबीआई की छिबैया शाखा का शाखा प्रबंधक था। उसने गोविंदराम के साथ मिलकर साजिश रची।
गोविंदराम ने ब्रह्म प्रकाश और गोपीकृष्ण के साथ मिलकर रामानंद प्रसाद, विनोद महतो तथा दिलीप कुमार श्रीवास्तव के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
इसके आधार पर जमीन खरीदने और मकान बनवाने के लिए 7 लाख 25 हजार का कर्ज मंजूर कर दिए गए।